'VC का आदेश अवैध', हिमाचल की नौणी यूनिवर्सिटी विवाद पर HAS एसोसिएशन ने जताई आपत्ति; मुख्य सचिव से कार्रवाई की मांग
एचएएस एसोसिएशन ने डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी यूनिवर्सिटी नौणी के कार्यवाहक कुलपति द्वारा रजिस्ट्रार की शक्तियां छीनने के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है।

नौणी यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एचएएस अधिकारी सिद्धार्थ आचार्य व कार्यवाहक वीसी डा. एचएस बवेजा।
HighLights
HAS एसोसिएशन ने कुलपति द्वारा रजिस्ट्रार की शक्तियां छीनने पर आपत्ति जताई।
एसोसिएशन ने आदेश को अवैध, असंवैधानिक और मनमाना कदम करार दिया।
मुख्य सचिव से तत्काल हस्तक्षेप और कुलपति के खिलाफ कार्रवाई की मांग।
जागरण संवाददाता, मंडी। डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी यूनिवर्सिटी नौणी के कार्यवाहक कुलपति डा. एचएस बावेजा द्वारा रजिस्ट्रार एवं एचएएस अधिकारी सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियों को छीने जाने के आदेश के बाद हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा (एचएएस) एसोसिएशन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने इसे अवैध, असंवैधानिक और मनमाना कदम करार देते हुए मुख्य सचिव को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अधिनियम और वैधानिक प्रविधानों का उल्लंघन
एचएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रवण मांटा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश कृषि, बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1986 के तहत रजिस्ट्रार एक वैधानिक प्राधिकरण और राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। एसोसिएशन का तर्क है कि कार्यवाहक कुलपति के पास राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी अधिकारी की शक्तियों को कम करने या वापस लेने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। यह आदेश पूरी तरह से अल्ट्रा वायर्स (अधिकार क्षेत्र से बाहर), शून्य और राज्य सरकार के प्राधिकार को चुनौती देने वाला है।
सरकारी निर्देशों का पालन करने पर अधिकारी को निशाना बनाने का आरोप
एसोसिएशन का गंभीर आरोप है कि सिद्धार्थ आचार्य राज्य सरकार (बागवानी विभाग) के लिखित निर्देशों के अनुसार पूरी ईमानदारी से कार्य कर रहे थे। सरकारी नियमों और निर्देशों का पालन करने वाले एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को दंडित करना विश्वविद्यालय प्रशासन की दुर्भावनापूर्ण मंशा को उजागर करता है, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार की निगरानी को दरकिनार करना है।
अधिकारियों में जाएगा गलत संदेश
एचएएस एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि अकादमिक प्रशासक इस तरह राज्य कैडर के अधिकारियों को उनके वैधानिक पदों पर रहते हुए प्रताड़ित करने लगे, तो इससे पूरे सिविल सेवा कैडर में गलत संदेश जाएगा। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था चरमराएगी, बल्कि राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित विश्वविद्यालयों का ढांचा भी कमजोर होगा।
सरकार के समक्ष रखी तीन प्रमुख मांगें
- आदेश को किया जाए निरस्त: कार्यवाहक कुलपति की तरफ से जारी किए गए शक्ति-वापसी के आदेशों को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की सभी वैधानिक व प्रशासनिक शक्तियां पूरी तरह बहाल हों।
- कार्यवाहक कुलपति पर हो कार्रवाई: अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मनमाने आदेश पारित करने के लिए कार्यवाहक कुलपति डा. एचएस बावेजा के खिलाफ सरकार उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करे।
- अधिकारियों की सुरक्षा हो सुनिश्चित: सभी स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और राज्य संस्थानों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में सरकार की तरफ से तैनात किसी भी सिविल सेवक के काम में मनमाना हस्तक्षेप या उनका प्रशासनिक उत्पीड़न न हो सके।
राज्यपाल और सीएम से भी मांग
इस मामले की प्रति राज्यपाल (कुलाधिपति), मुख्यमंत्री, कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव और बागवानी सचिव को भी भेजी गई हैं। एसोसिएशन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रशासनिक कैडर का मनोबल प्रभावित होगा।
