'समान कार्य पर सीनियर की सैलरी जूनियर से कम नहीं हो सकती', हिमाचल हाई कोर्ट ने वरिष्ठता सूची बदलने का दिया आदेश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि समान कार्य कर रहे वरिष्ठ अधिकारी का वेतन कनिष्ठ कर्मचारी से ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
समान कार्य पर वरिष्ठ अधिकारी का वेतन कनिष्ठ से कम नहीं।
आरक्षण से पहले पदोन्नत कनिष्ठ का वेतन भी वरिष्ठ से कम नहीं।
हिमाचल हाई कोर्ट ने सरकार को वरिष्ठता सूची बदलने का आदेश दिया।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक ही ग्रेड में समान कार्य कर रहे किसी वरिष्ठ अधिकारी का वेतन उसके कनिष्ठ कर्मचारी से कम नहीं हो सकता। भले ही उस कनिष्ठ कर्मचारी को संवैधानिक आरक्षण नियमों के तहत समय से पहले पदोन्नति क्यों न मिल गई हो। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज ने याचिकाकर्ता दिलबाग राय सेतिया की याचिका को स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार को वरिष्ठता सूची को दोबारा तैयार करने और वेतन को कनिष्ठ कर्मचारियों के बराबर करने का आदेश दिया है।
एससी वर्ग के जूनियर को कर दिया प्रमोट
याचिकाकर्ता को सात फरवरी 1973 को सेक्शन ऑफिसर नियुक्त किया था, जिसका पदनाम बाद में जूनियर इंजीनियर (सिविल) कर दिया था। जूनियर इंजीनियर की अंतिम वरिष्ठता सूची में उनका नाम वरिष्ठता क्रमांक 465 पर था। उनके कुछ कनिष्ठ सहयोगी अक्टूबर 1973 में नियुक्त हुए थे। ये कनिष्ठ कर्मचारी अनुसूचित जाति श्रेणी से संबंधित थे, इसलिए आरक्षण नियमों के तहत उन्हें 27 मई 1998 को ही असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर पदोन्नत कर दिया।
जूनियर को मिल रहा था अधिक वेतन
सामान्य श्रेणी का होने के कारण याचिकाकर्ता दिलबाग राय को पांच अप्रैल 2006 को असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में नियमित पदोन्नति मिली। इसके चलते उनके जूनियर उनसे अधिक वेतन पा रहे थे, जिसे सरकार ने ठीक करने से इन्कार कर दिया था।
सरकार के तर्क खारिज
कोर्ट ने सरकार के तर्कों को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि यदि सामान्य श्रेणी का कोई वरिष्ठ कर्मचारी आरक्षित श्रेणी के कनिष्ठ कर्मचारी के बाद लेकिन उससे अगली पदोन्नति मिलने से पहले उच्च पद पर पहुंच जाता है तो वह उच्च पद पर भी अपने कनिष्ठ से वरिष्ठ ही माना जाएगा। पदोन्नति मिलते ही वह अपनी मूल वरिष्ठता वापस पा लेता है।
जब दो अधिकारी एक ही ग्रेड में हैं और समान कार्य कर रहे हैं तो वरिष्ठ को कनिष्ठ से कम वेतन देना अवैध, मनमाना और भेदभावपूर्ण है। वित्त विभाग की यह दलील मान्य नहीं है कि आरक्षण रोस्टर के कारण वेतन संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
