हिमाचल हाई कोर्ट के आदेश पर भी नहीं रुका डेपुटेशन का खेल, HRTC के 50 ड्राइवर अफसरों के घर या अन्य जगह दे रहे सेवाएं
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कई विभागों में कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर बने हुए हैं, जबकि शिक्षा विभाग ने अनुपालन किया है।

एचआरटीसी बसों के के ड्राइवर भी डेपुटेशन पर डटे हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारी डटे।
शिक्षा विभाग ने अनुपालन किया, अन्य विभाग टालमटोल कर रहे।
एचआरटीसी के 50 से अधिक चालक अभी भी अन्यत्र सेवारत।
प्रकाश भारद्वाज, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार के कई प्रमुख विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में कर्मचारी-अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर डटे हुए हैं। कुछ विभागों में दो से पांच कर्मचारी तक दूसरे स्थानों पर सेवाएं दे रहे हैं और मूल विभाग में लौटने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालक ने पंचायतीराज विभाग में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया है। फाइल पर अभी स्वीकृति मिलना बाकी है।
दूसरी ओर, विभागों में आदेश के अनुपालन की स्थिति अलग-अलग है। शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे कर्मचारी मूल स्थान पर लौट आए हैं, जबकि अन्य विभागों में ऐसे कर्मचारियों को विभागीय स्तर पर बनाए रखने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं।
राज्य सचिवालय से एचआरटीसी के 10 चालक निगम में नहीं लौटे हैं। आरोप है कि वे प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में वहीं सेवाएं दे रहे हैं। निगम के 50 से अधिक चालक या तो अधिकारियों के घरों में घरेलू कार्य कर रहे हैं या विभिन्न विभागों में वाहन चला रहे हैं।
एक अधिकारी के चालक को दिल्ली साथ ले जाने की बात भी सामने आई है। निगम में ऐसे अधिकारी भी रहे हैं, जो तबादला होने पर चालक को अपने साथ ले जाते रहे।
निकाल लिया अलग रास्ता
हाई कोर्ट के मूल स्थान पर लौटने के आदेश का प्रभावशाली कर्मचारियों और अधिकारियों ने अलग रास्ता निकाल लिया। करीब 15 से 20 शिक्षकों, प्रवक्ताओं और आचार्यों के मामले में प्रतिनियुक्ति की शर्त बदलकर समायोजन का रास्ता निकाले जाने की बात सामने आई है। इससे उन्हें शिक्षा निदेशालय से स्कूलों में लौटने की जरूरत नहीं रही।
प्रतिनियुक्ति का नियम, वापसी की राह लंबी
सरकारी विभागों या सार्वजनिक उपक्रमों में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद मूल विभाग में लौटने का प्रविधान है। सामान्यतः यह अवधि अधिकतम तीन से पांच वर्ष तक बताई गई है। हालांकि आरोप है कि राजनीतिक संपर्कों से कई कर्मचारी लंबे समय तक मूल विभाग से बाहर बने रहते हैं।
विभागों ने अपने-अपने हिसाब से लिया आदेश
शिक्षा विभाग को छोड़कर अन्य विभागों में हाई कोर्ट के प्रतिनियुक्ति संबंधी आदेश के अनुपालन की स्थिति अलग बताई जा रही है। शिक्षा विभाग ने आदेश के अनुसार प्रतिनियुक्त कर्मचारियों को मूल स्थान पर भेजा है, जबकि अन्य विभागों में दूसरे विभागों में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों और अधिकारियों को वापस बुलाने के निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
