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हिमाचल सरकार की अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने की तैयारी, विभागों से मांगा रिकॉर्ड

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 03 Nov 2026 05:34 PM (IST)

हिमाचल सरकार अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया पर मंथन कर रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने की तैयारी।

  2. सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज की, आदेश बरकरार।

  3. सरकार ने सभी विभागों से पात्र कर्मचारियों का रिकॉर्ड मांगा।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी एक्ट रद होने और सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद राज्य सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने की प्रक्रिया पर मंथन शुरू कर दिया है। सरकार ने सभी विभागों से ऐसे कर्मचारियों का पूरा ब्योरा मांगा है, जो अदालत के फैसले के तहत इन लाभों के पात्र हो सकते हैं। 

फिलहाल सरकार के पास विभागवार पात्र कर्मचारियों की संख्या का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
शिमला में मंगलवार को मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई बैठक में इस मामले पर चर्चा की गई। इसमें प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, प्रधान सचिव कार्मिक एम. सुधा देवी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। 

रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश

मुख्य सचिव ने विभागों को प्रभावित कर्मचारियों का नियुक्ति माध्यम, अनुबंध सेवाकाल, नियमितीकरण की तिथि और वर्तमान सेवा स्थिति सहित पूरा रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए। आंकड़े मिलने के बाद ही पात्र कर्मचारियों की संख्या और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय भार का आकलन हो सकेगा।

लाभ एकरूप रखने की तैयारी

सरकार सभी विभागों में लाभ देने की प्रक्रिया एकरूप रखने की तैयारी कर रही है। इसके लिए कार्मिक विभाग सामान्य दिशा-निर्देश जारी करेगा। इनमें पात्रता और लाभ देने की प्रक्रिया स्पष्ट की जाएगी। कार्मिक विभाग को विधि विभाग से परामर्श लेने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि अदालत के आदेशों की अनुपालना में कोई कानूनी विसंगति न रहे।

अनुबंध कर्मचारियों की तीन श्रेणियां

बैठक में अनुबंध कर्मचारियों की तीन श्रेणियां तय कर उनका अलग-अलग रिकार्ड जुटाने पर चर्चा हुई। पहली श्रेणी में राज्य चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी, दूसरी में साक्षात्कार और बैचवाइज आधार पर भर्ती कर्मचारी तथा तीसरी में वे कर्मचारी शामिल हैं, जो पहले अस्थायी या अन्य माध्यमों से नियुक्त हुए और निर्धारित कार्यकाल पूरा करने के बाद अनुबंध पर आए।

2003 से शुरू हुई अनुबंध भर्तियां, एक्ट को कोर्ट में मिली चुनौती

हिमाचल में वर्ष 2003 के बाद अनुबंध आधार पर भर्तियां शुरू हुईं। समय के साथ अनुबंध नीति में बदलाव होता रहा और अनुबंध से नियमित होने की अवधि आठ वर्ष से घटकर दो वर्ष रह गई। नियुक्ति तिथि और अनुबंध सेवाकाल के आधार पर लाभ देने को लेकर अदालतों में कई मामले पहुंचे। वित्तीय देनदारियों से बचने के लिए राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस आफ गवर्नमेंट एम्प्लाइज एक्ट, 2024 विधानसभा में पारित करवाया। इसमें प्रविधान किया गया कि अनुबंध कर्मचारियों पर नियमित नियुक्ति से जुड़े प्रविधान लागू नहीं होंगे। सरकार ने इस एक्ट को पिछली तिथि से लागू किया था। कर्मचारियों ने एक्ट को हाई कोर्ट में चुनौती दी। 

हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल को इसे असंवैधानिक करार दिया। इसके बाद सुक्खू सरकार ने फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की, जिसे 29 जुलाई को खारिज कर दिया गया। सुप्रीमकोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए वित्तीय लाभ के भुगतान के लिए चार महीने का समय दिया था। इस आदेश से राहत पाने के लिए राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की, लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया।

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