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'सिंगल इंजन सरकार ने दिलाए हिमाचल को हक', BBMB जीत पर CM सुक्खू बोले- आत्मनिर्भर बनने की राह पर प्रदेश

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 07 Nov 2026 04:10 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में बिजली हिस्से के बकाया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक जीत बताया है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने बीबीएमबी बिजली हिस्से पर हिमाचल के पक्ष में फैसला दिया।

  2. मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसे सरकार की ऐतिहासिक जीत और चौथी बड़ी उपलब्धि बताया।

  3. किशाऊ बांध समझौते को रणनीतिक हथियार बनाकर बकाया हक हासिल किया।

राज्य ब्यूरो, शिमला। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में हिमाचल प्रदेश के बकाया बिजली हिस्से को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के बाद राज्य सरकार ने इसे ऐतिहासिक जीत करार दिया है। दिल्ली दौरे से लौटकर ओक ओवर में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हमारी इच्छाशक्ति बिकाऊ नहीं है। 

यदि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होती तो संभवतः उत्तराखंड की तरह कमजोर समझौता करना पड़ता। प्रदेश की जनता ने कांग्रेस की सिंगल इंजन सरकार पर भरोसा किया, जिसने बिना झुके अधिकारों की लड़ाई लड़ी।"

हिमाचल बनेगा आत्मनिर्भर

उन्होंने भाजपा को नकारात्मक राजनीति छोड़कर राज्य के हितों में सरकार का साथ देने की चुनौती दी। साथ ही दोहराया कि सरकार वर्ष 2032 तक हिमाचल प्रदेश को देश का सबसे समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। 

20 हजार करोड़ रुपये तक राजस्व 

करीब 15 वर्षों से लंबित इस मामले में कांग्रेस सरकार की दृढ़ राजनीतिक और कानूनी इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश के अधिकारों की बहाली संभव हुई है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले 20 वर्षों में बीबीएमबी से हिमाचल को 15 से 20 हजार करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है।

500 करोड़ रुपये मिलेंगे

मुख्यमंत्री ने आर्थिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि यह बिजली 6 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची जाती है, तो प्रदेश को तत्काल लगभग 500 करोड़ रुपये मिलेंगे। सरकार का प्रयास अधिकतम मूल्य प्राप्त करने का रहेगा, जिससे यह वार्षिक आय 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सके। दीर्घावधि में अगले दो दशकों के भीतर प्रदेश के खजाने में 15 से 20 हजार करोड़ रुपये आने का अनुमान है। उन्होंने इसे अपनी सरकार के चार साल के कार्यकाल की चौथी बड़ी उपलब्धि बताया। 

बीबीएमबी बकाया मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करवाकर 15 साल से लंबित हक सुनिश्चित कराया। वाइल्ड फ्लावर हाल मामला के 27 वर्षों से अदालतों में उलझे इस विवाद को सुलझाकर राजस्व सीधे प्रदेश के खाते में लाया। 

करछम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में 6 प्रतिशत मुफ्त बिजली रायल्टी का अधिकार हासिल किया, जिससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये मिलेंगे। और किशाऊ बांध परियोजना समझौते से आगामी पांच वर्षों में राज्य को लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है।

किशाऊ बांध समझौते को बनाया रणनीतिक हथियार

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह डिक्री करीब डेढ़ दशक से निष्प्रभावी पड़ी थी, क्योंकि पूर्व सरकारों ने इस पर समयबद्ध पैरवी नहीं की। सुक्खू के अनुसार, इस गतिरोध को तोड़ने के लिए किशाऊ बांध परियोजना को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया। उन्होंने 16 दिसंबर को स्पष्ट पत्र लिखकर शर्त रखी थी कि जब तक हरियाणा सरकार बीबीएमबी के बकाया भुगतान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर नहीं करती, तब तक किशाऊ बांध समझौते पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। हरियाणा द्वारा यह शर्त स्वीकार करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में मामले को निर्णायक मोड़ मिला। उन्होंने कहा कि पंजाब की प्रारंभिक हिचकिचाहट के बावजूद हिमाचल ने अपने हिस्से से कोई समझौता नहीं किया।

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