'पुश्तैनी भूमि वापस करो', हिमाचल में स्कूल बंद हुए तो दान दी गई जमीन वापस मांगने लगे लोग; शिक्षा विभाग ने क्या कहा?
हिमाचल में स्कूल बंद होने या विलय के बाद जमीन दान करने वाले लोग अपनी भूमि वापस मांग रहे हैं। ...और पढ़ें

हिमाचल में पुश्तैनी जमीन वापस मांग रहे लोग (फाइल फोटो)
HighLights
स्कूल बंद होने पर दानदाता जमीन वापस मांग रहे
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी
पौने चार वर्ष में 1526 स्कूल बंद/मर्ज
अनिल ठाकुर, शिमला। गांव में स्कूल खुलेगा तो बच्चों को दूर नहीं जाना पड़ेगा, उनकी पढ़ाई आसान होगी और भविष्य संवरेगा। इसी उम्मीद में किसी ने अपनी जमीन का टुकड़ा दान कर दिया तो किसी ने स्कूल भवन बनाने के लिए पुश्तैनी भूमि तक दे दी।
विद्यार्थियों की संख्या कम होने पर स्कूल बंद या दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिए तो जमीन दान करने वालों ने सवाल उठाने आरंभ कर दिए। अब कुछ दानदाता जमीन वापस मांग रहे हैं। शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने सभी जिलों के प्रारंभिक व उच्च शिक्षा उपनिदेशकों को पत्र जारी कर ऐसे स्कूलों और उनसे जुड़ी जमीन के मामलों की पूरी रिपोर्ट निदेशालय भेजने को कहा है।
विभाग को खुद ही पता नहीं है कि ऐसे कितने मामले हैं जिनमें जमीन दान की है, लेकिन उसका इंतकाल अभी तक विभाग के नाम नहीं हुआ है। रतन साईं बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले में न्यायालय में सुनवाई के बीच शिक्षा विभाग ने जमीन के दान से जुड़े दस्तावेज, इंतकाल व अन्य दस्तावेजों की स्थिति का ब्योरा तलब किया है। विभाग को इन मामलों की जानकारी सरकार को उपलब्ध करवानी है।
चार श्रेणियों में मांगी जानकारी
शिक्षा विभाग ने जमीन से जुड़े मामलों को चार श्रेणियों में बांटकर जानकारी मांगी है। पहली श्रेणी में वे स्कूल हैं, जो बंद हो चुके हैं या दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिए हैं, लेकिन उनके भूमि दान करने से संबंधित दस्तावेज, इंतकाल व अन्य दस्तावेज नहीं हैं।
दूसरी श्रेणी में ऐसे बंद या मर्ज हो चुके स्कूल हैं, जिनके भूमि से संबंधित दस्तावेज तो हैं लेकिन दानदाता उसे वापस मांग रहे हैं। तीसरी श्रेणी में उन स्कूलों का ब्योरा मांगा गया है जो अभी भी संचालित हैं।
इन स्कूलों के लिए जमीन दान की गई थी और दस्तावेज भी हैं, लेकिन दानदाता अब भूमि वापस मांग रहे हैं। चौथी श्रेणी में ऐसे स्कूलों की जानकारी मांगी है, जो संचालित हैं, लेकिन उनकी जमीन के दानपत्र और इंतकाल की प्रक्रिया पूरी नहीं की है।
पौने चार वर्ष में 1526 स्कूल बंद और मर्ज किए
सरकार ने पौने चार वर्ष में 1526 स्कूल बंद व मर्ज किए हैं। जिन स्कूलों में दाखिला शून्य था उन्हें डी-नोटीफाई किया गया, जबकि जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या पांच व इससे कम थी उन्हें साथ लगते स्कूलों में मर्ज किया।
