विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भरमौर के जंगलों में फिर दिखा दुर्लभ हिमालयी भूरा भालू, वन्यजीव संरक्षण को मिली बड़ी सफलता

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:00 AM (IST)

चंबा के भरमौर स्थित तुंदाह वन्यजीव अभयारण्य में दुर्लभ हिमालयी भूरा भालू फिर से देखा गया है। ट्रैप कैमरे में ...और पढ़ें

भरमौर में दूसरी बार दिखा दुर्लभ भालू।

भरमौर में दूसरी बार दिखा दुर्लभ भालू।

HighLights

  1. तुंदाह अभयारण्य में दुर्लभ हिमालयी भूरा भालू दिखा

  2. ट्रैप कैमरे में दूसरी बार कैद हुई भालू की तस्वीर

  3. स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र और संरक्षण प्रयासों की सफलता

संवाद सहयोगी, चंबा। जनजातीय उपमंडल भरमौर के तुंदाह वन्यजीव अभयारण्य से पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साहजनक खबर आई है। अभयारण्य के ऊंचे जंगलों में दुर्लभ हिमालयी भूरा भालू देखा गया है।

वन विभाग के ट्रैप कैमरे में उसकी चहलकदमी दर्ज हुई। अभयारण्य में इस भालू की तस्वीर कैमरे में कैद होने का यह दूसरा मामला है। जानकारी के अनुसार, तुंदाह बीट में तैनात फोरेस्ट गार्ड शुकर दीन ने क्षेत्र में ट्रैप कैमरा लगाया था, जिसमें यह दुर्लभ वन्य प्राणी दर्ज हुआ।

भरमौर में दिखा दुर्लभ भालू

यह रिकार्डिंग दर्शाती है कि भरमौर की उच्च हिमालयी घाटियां इस लुप्तप्राय जीव के प्राकृतिक पर्यावास के लिए अनुकूल और सुरक्षित हैं। चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में स्थित तुंदाह और कुगती वन्यजीव अभयारण्य समृद्ध जैव विविधता के लिए उत्तर भारत में विख्यात हैं।

यहां हिमालयी भूरे भालू के अलावा हिमालयी थार, घोरल, सांभर, तेंदुआ, कस्तूरी मृग और लाल लोमड़ी जैसे दुर्लभ व संकटग्रस्त वन्यजीव भी विचरण करते हैं। इन जंगलों में भूरे भालू की लगातार मौजूदगी दर्ज होना वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

चंबा जिले के भरमौर के तुंदाह वन्य अभयारण्य में विचरण करता भूरा भालू।

दुर्लभ भालू को देख वन्यजीव में उत्साह

भरमौर के तुंदाह अभयारण्य में हिमालयी भूरे भालू की मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। तुंदाह वन्यजीव अभयारण्य में दुर्लभ हिमालयी भूरे भालू का ट्रैप कैमरे में दूसरी बार कैद होना हमारे पूरे वन्यजीव प्रभाग के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक है।

यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र बेहद स्वस्थ है और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित प्राकृतिक पर्यावास उपलब्ध करवा रहा है।

यह भी पढ़ें- जटोली शिव मंदिर: जहां पत्थरों से आती है डमरू की आवाज और कुंड के जल में छिपा है बीमारियों का इलाज!