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हिमाचल में बच्चों के स्कूल दाखिले को लेकर बदले नियम, अन्य राज्यों के छात्रों को नहीं बैठा सकेंगे पिछली कक्षा में

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Fri, 06 Nov 2026 06:50 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश में अब अन्य राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज कक्षा से निचली कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

हिमाचल शिक्षा विभाग ने अन्य राज्यों के बच्चों के लिए प्रवेश नियम बदले हैं। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल शिक्षा विभाग ने अन्य राज्यों के बच्चों के लिए प्रवेश नियम बदले हैं। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. अन्य राज्यों के छात्रों को निचली कक्षा में नहीं बैठाया जाएगा।

  2. स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के आधार पर ही मिलेगा प्रवेश।

  3. शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक निरंतरता हेतु यह निर्णय लिया।

अनिल ठाकुर, शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब अन्य राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई में कमी या पाठ्यक्रम पूरा न होने का हवाला देकर निचली कक्षा में नहीं बैठाया जा सकेगा। ऐसे विद्यार्थियों को जारी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज कक्षा में ही प्रवेश देना अनिवार्य होगा। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों को निर्देश जारी कर सरकारी और निजी स्कूलों में इनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

शिक्षा निदेशालय ने अन्य राज्यों से हिमाचल आने वाले कुछ विद्यार्थियों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज कक्षा में प्रवेश न देने के मामले सामने आने के बाद यह निर्णय लिया है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ उनकी शैक्षणिक निरंतरता भी टूट रही थी।

निदेशक ने जारी किया पत्र

निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली की ओर से यह पत्र जारी किया गया है। इस फैसले से उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जिन्हें अन्य राज्यों से हिमाचल आने पर दोबारा पिछली कक्षा में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ता था। कई स्कूल दाखिले से पहले विद्यार्थियों का टेस्ट लेते थे। इसमें प्रदर्शन कमजोर रहने पर उन्हें स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज कक्षा के बजाय निचली कक्षा में प्रवेश दिया जाता था।

स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नहीं तो आयु के अनुसार मिलेगा दाखिला

यदि किसी विद्यार्थी के पास स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नहीं है तो ऐसे मामलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 के प्रविधानों के अनुसार आयु के अनुरूप कक्षा में प्रवेश देने का सिद्धांत अपनाया जा सकता है। निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों के सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों व मुख्याध्यापकों को आदेश से अवगत करवाएं और इनका पालन सुनिश्चित करें।

ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन स्कूलों के बीच भी आती है दिक्कत

हिमाचल में ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों के शैक्षणिक सत्र में अंतर होने के कारण भी विद्यार्थियों को परेशानी होती है। अन्य राज्यों से आने वाले बच्चों का पाठ्यक्रम हिमाचल के पाठ्यक्रम से कुछ पीछे या आगे हो सकता है। ऐसे में पढ़ाई में अंतर को दूर करने के बजाय कक्षा घटा देना उनके लिए नुकसानदायक साबित होता है।

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