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हिमाचल में 20 से 30 साल तक नहीं टूटेंगी सड़कें, PWD ने तैयार किया रोडमैप; प्लास्टिक और सीमेंट से होगा निर्माण

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 20 Oct 2026 06:19 PM (IST)Updated: Tue, 20 Oct 2026 06:26 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रतिरोधी सड़कें बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने नया रोडमैप तैयार किया है। अब कोलतार ...और पढ़ें

हिमाचल में अब लंबे समय तक टिकने वाली सड़कें बनेंगी। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल में अब लंबे समय तक टिकने वाली सड़कें बनेंगी। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. हिमाचल में जलवायु अनुकूल सड़कों का नया रोडमैप।

  2. कोलतार की जगह सीमेंट-प्लास्टिक तकनीक का उपयोग।

  3. सड़कें 20-30 साल तक चलेंगी, रखरखाव कम।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि जीवनरेखा हैं। वर्ष 2023 की आपदा में मंडी, कुल्लू और चंबा सहित कई जिलों में सड़क संपर्क लंबे समय तक बाधित रहा। कोलतार की सड़कें पानी सोखने और जलभराव के कारण उखड़ने लगती हैं। भूस्खलन और सड़कों की मरम्मत पर हर साल 100 से 200 करोड़ रुपये तक का बोझ पड़ता है। 

इसे देखते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने जलवायु अनुकूल सड़कों का रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत पहाड़ों में परंपरागत बिटुमिन (कोलतार) के विकल्प के रूप में सीमेंट कंक्रीट और वेस्ट प्लास्टिक मिश्रित तकनीक से टिकाऊ सड़कें बनाने पर जोर दिया जाएगा।

20 से 30 तक टिकने वाली सड़कें बनेंगी

सीमेंट कंक्रीट की सड़कों की शुरुआती लागत करीब 30 प्रतिशत अधिक है, लेकिन प्लास्टिक मिश्रित निर्माण सामग्री से बनी सड़कों की आयु 20 से 30 साल तक होने और इनके रखरखाव की जरूरत बेहद कम रहने का दावा है। लक्ष्य ऐसी सड़कें तैयार करना है, जो आपदा के दौरान भी सेना, पर्यटकों और सेब ढुलाई करने वाले ट्रकों के लिए बारहमासी संपर्क बनाए रखें।

अब तक क्या होता था और आगे क्या होगा

अब तक लोक निर्माण विभाग पानी वाले संवेदनशील स्थानों पर 10-20 मीटर का पैच लगाता था और चुनिंदा जगह पर ही 100 से 500 मीटर तक प्लास्टिक मिक्स सड़क बनाई जाती थी। प्लास्टिक से पानी का रिसाव रुका और लाइफ 15 प्रतिशत बढ़ी। ये प्रयोगात्मक स्तर पर ही रहा। लोक निर्माण विभाग ने दो अनिवार्य तकनीकों पर कई स्तर की चर्चा की है। जिसके तहत क्रास ड्रेनेज को सुनिश्चित करते हुए हर सड़क के साथ पक्के कलवर्ट-नाली और वाटर आउटलेट अनिवार्य किया जा रहा है ताकि पानी सड़क न काटे। 

पंडोह-टकोली में एनएचएआइ ने जो ड्रेजिंग का मॉडल दिया, वही लोक निर्माण विभाग भी अपनाएगा। दूसरे उपाय के तहत स्लोप स्टेबलाइजेशन के तहत सड़क के साथ पहाड़ी रोकने को बायो-इंजीनियरिंग, राक बोल्टिंग और वायर क्रेट की पद्धति को अपनाया जाएगा। 

वर्ष 2023 की आपदा के बाद बढ़ा नुकसान का दबाव

वर्ष 2023 में प्राकृतिक आपदा और बाढ़ से लोक निर्माण विभाग को दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था। ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में सड़कें बहने की घटनाएं सामने आती रही हैं। विभाग के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में भी उसे हर साल एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। आधुनिक तकनीक से बने फोरलेन भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुए, जिससे लंबे समय तक यातायात को वैकल्पिक संपर्क मार्गों से चलाना पड़ा।

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