हिमाचल में दीवाली पर पटाखों से प्रदूषण की 29 जगह होगी निगरानी, AQI के साथ जहरीली गैसों की भी होगी जांच
हिमाचल प्रदेश में दीवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण की इस बार विस्तृत निगरानी की जाएगी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में पटाखों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए 29 जगह केंद्र स्थापित किए हैं।
HighLights
29 केंद्रों पर पटाखों से प्रदूषण की विस्तृत निगरानी।
AQI के साथ जहरीली गैसों की भी होगी जांच।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आतिशबाजी पर रोक।
राज्य ब्यूरो, शिमला। दीवाली पर पटाखों से हवा में घुलने वाले प्रदूषण की इस बार विस्तृत निगरानी होगी। केवल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) के आधार पर आकलन करने के बजाय हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों और जहरीली गैसों की भी जांच की जाएगी। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए विशेष अभियान शुरू किया है। पहली नवंबर से शुरू हुआ यह अभियान दीवाली के बाद भी जारी रहेगा। इसके तहत पर्व से पहले, दिवाली के दिन और बाद में पटाखों के धुएं का असर परखा जाएगा।
वायु और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी
प्रदेश के 29 केंद्रों पर अत्याधुनिक उपकरणों से वायु और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की जा रही है। पीएम-2.5, पीएम-10 के अलावा सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड की जांच होगी। अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभिन्न स्थानों पर स्थापित उपकरणों से हवा में धूल और धुएं के कणों के साथ शोर का स्तर भी मापा जा रहा है।
रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक आतिशबाजी पर रोक
प्रदूषण नियंत्रण के लिए अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के आसपास पटाखे चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस बल को भी नियमों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार के निर्देशों के अनुसार ग्रीन पटाखे रात आठ से दस बजे तक ही चलाए जा सकेंगे। रात दस बजे से सुबह छह बजे तक आतिशबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पीएम-2.5 फेफड़ों से रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं कण
पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर हवा में मौजूद धूल, धुएं और अन्य प्रदूषक कणों के आकार को दर्शाता है। पीएम-2.5 में 2.5 माइक्रोमीटर या इससे छोटे व्यास वाले कण शामिल होते हैं, जो बाल की मोटाई से लगभग 30 गुना छोटे होते हैं। ये वाहन, पटाखे, लकड़ी और कोयला जलने से निकलते हैं। सांस के साथ फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंचने के बाद रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं।
वहीं, पीएम-10 में 10 माइक्रोमीटर या इससे छोटे कण शामिल होते हैं। इनमें धूल, मिट्टी, सड़क की धूल, परागकण और निर्माण कार्य से निकलने वाले कण प्रमुख हैं। दिवाली के दौरान इन दोनों तरह के प्रदूषकों की निगरानी से पटाखों के कारण वायु गुणवत्ता में होने वाले बदलाव का आकलन किया जा सकेगा।
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