दीवाली से पहले बिगड़ी हिमाचल की हवा, सरकार ने पटाखों पर जारी किए सख्त निर्देश; बद्दी का AQI 227 पहुंचा
हिमाचल प्रदेश में दिवाली से पहले प्रदूषण का स्तर बढ़ा है, बद्दी का वायु गुणवत्ता सूचकांक 227 तक पहुंच गया ...और पढ़ें

HighLights
बद्दी का वायु गुणवत्ता सूचकांक 227 दर्ज, खराब श्रेणी में।
सरकार ने दिवाली पर ग्रीन पटाखों के लिए दो घंटे तय किए।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखे जलाने पर प्रतिबंध।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में त्योहारों के उल्लास के बीच प्रदूषण का खतरा बढ़ने लगा है। औद्योगिक क्षेत्र बद्दी की हवा पहली बार खराब श्रेणी में पहुंच गई है। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 227 दर्ज किया गया, जो 2 नवंबर को 200 दर्ज किया गया था। पांवटा साहिब में भी एक्यूआइ 123 तक पहुंच गया है। बद्दी में हवा की गुणवत्ता का इस स्तर तक बिगड़ना चिंता बढ़ाने वाला है।
प्रदेश सरकार ने त्योहारी सीजन में प्रदूषण को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। ऐसे में अब केवल दो घंटे ग्रीन पटाखे चलेंगे और नियमों की अवहेलना करना भारी पड़ सकता है।
निर्देशों का कड़ाई से हो पालन
प्रदेश सरकार ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सख्ती बरतने और सर्वोच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को जिम्मेदारी के साथ नियमों की अनुपालना करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रमाणित ग्रीन पटाखों पर जोर
पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रमाणित ग्रीन पटाखों पर जोर दिया है। सीएसआइआर-एलईईआरआइ और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) से प्रमाणित पटाखों को ही निर्धारित शर्तों के तहत इस्तेमाल करने की अनुमति है। बेरियम युक्त पटाखों और गैर-प्रमाणित पटाखों पर प्रतिबंध है। पटाखों की लड़ियां और मालाएं बनाने तथा बेचने पर भी रोक लगाई गई है। अवैध पटाखों की बिक्री रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई के निर्देश हैं। रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक पटाखे जलाने पर प्रतिबंध है।
ध्वनि वर्जित क्षेत्रों में नहीं चला सकेंगे पटाखे
अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के आसपास भी पटाखों के इस्तेमाल पर पाबंदियां हैं। पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकता है। वहीं तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सामान्य नियमों के तहत अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों और अन्य अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 100 मीटर के दायरे को शांत क्षेत्र माना जाता है।
201 से 300 के बीच एक्यूआइ खराब श्रेणी में
राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के मानकों के अनुसार 201 से 300 के बीच एक्यूआइ खराब श्रेणी में आता है, जबकि 101 से 200 के बीच मध्यम श्रेणी मानी जाती है। इस लिहाज से बद्दी का 227 एक्यूआइ सीधे खराब श्रेणी में है और पांवटा साहिब का 123 मध्यम श्रेणी में है।
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