हिमाचल सरकार दे रही कितनी सब्सिडी, कौन सी मुफ्त और रियायती योजनाएं चला रखीं? RDG खत्म होने के बाद मंडरा रहा संकट
राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार की सब्सिडी और मुफ्त योजनाओं पर संकट मंडरा रहा ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से सब्सिडी पर संकट।
₹2200 करोड़ की सब्सिडी, ₹1500 मासिक पेंशन शामिल।
कर्मचारियों का ₹8500 करोड़ बकाया, ₹13000 करोड़ कर्ज।
जागरण टीम, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार आरडीजी राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद सब्सिडी बंद करने की बात कह रही है। प्रदेश सरकार के किस योजना में कितनी सब्सिडी देती है और कौन सी मुफ्त या रियायती योजनाएं चला रखी हैं। दैनिक जागरण ने इसकी पड़ताल की है।
वर्तमान में प्रदेश सरकार की ओर से कुल 2200 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है, जिसमें राज्य विद्युत बोर्ड की ओर से 1200 करोड़, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सस्ते राशन पर 250 करोड़, एचआरटीसी 600 करोड़ रुपये व इसके अतिरिक्त भी अन्य प्रकार की सब्सिडी दी जा रही हैं।
मुफ्त और रियायती योजनाएं
- राज्य सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दे रही है।
- 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना' के तहत 18 से 60 वर्ष की पात्र महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह दिए जा रहे हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर वर्गों के लिए पानी मुफ्त है। ₹50,000 से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को 100 रुपये प्रतिमाह का शुल्क लागू किया है।
- राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं को किराये में 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
- आयुष्मान भारत से छूटे परिवारों को हिमकेयर के तहत पांच लाख तक का मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है।
1661 करोड़ सामाजिक सुरक्षा पेंशन का
प्रस्तुति में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत भी लाभार्थियों की संख्या तथा पात्रता मानकों की समीक्षा करने पर विचार किए जाने की बात कही है। वर्तमान में इस मद में राज्य पर लगभग 1661 करोड़ रुपये का व्यय भार है, जबकि प्रस्तावित व्यय को घटाकर 500 करोड़ रुपये तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है।
8500 करोड़ रुपये कर्मचारियों का बकाया
कर्मचारियों व पेंशनर्स के लिए पिछले वेतन आयोग के एरियर का 8500 करोड़ रुपये बकाया है। 5500 हजार करोड़ रुपये का डीए व एरियर बकाया है। सरकार अभी तक इसे नहीं दे पाई है। जो स्थिति बन रही है, उससे आगे भी डीए व डीआर देने की स्थिति मे सरकार नहीं है।
2000 करोड़ के बिल अगले बजट में जाएंगे
सरकार हिमकेयर व सहारा जैसी योजनाओं के बकाया भुगतान जो 400 से 500 करोड़ रुपये हैं, देने की भी स्थिति नहीं है। इसी तरह करीब विकास कार्यों के 2000 करोड़ के बिल भुगतान के लिए अगले बजट में जाएंगे। सर्विस मैटर से जुड़े हाईकोर्ट के आदेश से उपजे करीब 1000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
13 हजार करोड़ कर्ज के ब्याज को चाहिए
अगले वित्त वर्ष में राज्य की ऋण लेने की सीमा 10 हजार करोड़ रुपये है, जबकि अगले वित्तीय वर्ष में कर्ज व ब्याज चुकाने के लिए 13 हजार करोड़ चाहिए। ऐसे में 3000 करोड़ रुपये सरकार को बजट से चुकाने होंगे।
