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RDG बंद होने का हिमाचल पर असर: OPS के बजाय UPS लागू करने की सलाह, 2 साल से खाली पद खत्म; बिजली बोर्ड का निजीकरण होगा

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 09 Feb 2026 12:19 PM (IST)Updated: Mon, 09 Feb 2026 01:04 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से गंभीर वित्तीय संकट पैदा हो गया है। वित्त विभाग ने ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, एरियर नहीं मिलेगा, सब्सिडी बंद।

  2. OPS के बजाय यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (UPS) पर विचार।

  3. बिजली बोर्ड का निजीकरण, दो साल से खाली पद खत्म होंगे।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को महंगाई भत्ता व व एरियर संभव नहीं होगा। लोगों को दी जा रही सभी प्रकार की सब्सिडी भी बंद करनी पड़ेगी। यह सिफारिश वित्त विभाग के प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद राज्य की वित्तीय हालत पर दी प्रस्तुति में दी है।

शिमला में रविवार को राज्य सचिवालय में आरडीजी समाप्ति के प्रभावों पर दी गई प्रस्तुति के अनुसार आरडीजी बंद होने से प्रदेश सरकार संशोधित वेतनमान तो क्या डीए-एरियर देने तक की स्थिति में नहीं है। 

यूपीएस के बारे में सोचना होगा

मौजूदा स्थिति को देखते हुए भविष्य में यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (यूपीएस) के बारे में सोचना होगा। उन्होंने कहा कि ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) जब लागू की थी तो हिमाचल को 1800 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण कटौती का सामना करना पड़ा था। इससे राज्य को प्रति वर्ष लगभग 1800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की सुविधा प्राप्त हो सकेगी।

बिजली बोर्ड का निजीकरण, दो साल से खाली पड़े पद खत्म करने होंगे

इसके अतिरिक्त दो वर्ष से खाली पड़े पदों को खत्म करना होगा। केंद्र ने हमारे हाथ पैर बांध दिए, अगले साल वित्तीय मोर्चे पर सरकार चलाना मुश्किल होगा। राज्य बिजली बोर्ड का भी निजीकरण करना होगा। आरडीजी बंद होने के समीकरणों से कोई नई भर्ती की स्थिति में भी सरकार नहीं है। 

30 प्रतिशत संस्थान बंद करने की सलाह

मौजूदा स्थिति में जो स्टाफ है, उसी का युक्तीकरण करना होगा। जो संस्थान हैं, उनमें से 30 प्रतिशत बंद करने की सलाह है। राज्य की बहुत सी योजनाओं को बंद करना पड़ सकता है। केंद्र ने नया वेतन आयोग बनाया है, पंजाब भी उसे लागू करने की बात कर रहा है, लेकिन आरडीजी बंद होने से हिमाचल की स्थिति ये है कि नया तो क्या, पे-रिवीजन के बारे में भी नहीं सोच सकते। 

एचआरटीसी और बिजली बोर्ड को नहीं मिल पाएगी सब्सिडी

उन्होंने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को कोई सब्सिडी नहीं दे पाएंगे। इस वित्तीय वर्ष में राज्य विद्युत बोर्ड को दी जा रही सब्सिडी के तौर पर 1200 करोड़ रुपये भविष्य में देना संभव नहीं है। पानी और बिजली का बिल भी पूरी खपत के अनुसार लेने, सभी कर, शुल्क और उपयोग का पैसा पूरी दर से, पुराने बकाया समेत वसूलने, एमआइएस सब्सिडी खत्म करने और मकान कर और कूड़ा उठाने का शुल्क भी पूरी लागत से लेने पर विचार करना होगा। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि आने वाले समय में आरडीजी खत्म होने से कई गंभीर परिणाम होगे।

18 हजार करोड़ आय, व्यय 48 हजार करोड़

वर्तमान में राज्य की आय लगभग 18 हजार करोड़ रुपये है, जबकि प्रतिबद्ध व्यय लगभग 48 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें वेतन, पेंशन, ऋण का ब्याज और मूलधन, सब्सिडी, सामाजिक सुरक्षा पेंशन इत्यादि शामिल हैं। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में राज्य को लगभग 13,950 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त 10 हजार करोड़ रुपये के ऋण की सीमा को जोडक़र उपलब्ध संसाधनों से लगभग 42 हजार करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

सिफारिशों पर 11 को मंत्रिमंडल लेगा अंतिम निर्णय : हर्षवर्धन

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर मंत्रिमंडल के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी। इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए केवल सुझाव प्रस्तुत किए है और इस पर अंतिम निर्णय 11 फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा। 

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