शिमला सैटेलाइन टाउनशिप: जाठिया देवी में लोगों को सताने लगा विस्थापन का डर, 8 गांवों में होगा भूमि अधिग्रहण
Himachal Pradesh New City, शिमला के जाठिया देवी में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण का ग्रामीण विरोध कर ...और पढ़ें

शिमला का जाठिया देवी यहां नया शहर बसेगा।
HighLights
ग्रामीणों को सैटेलाइट टाउनशिप के लिए विस्थापन का डर।
आठ गांवों में 249 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण का विरोध।
लोगों ने सोशल इंपैक्ट टीम और मंत्री का काफिला रोका।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में जिला शिमला के टुटू विकास खंड के तहत जाठिया देवी में सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन न देने पर लोग अड़ गए हैं। लोगों को विस्थापन का डर सताने लगा है। सरकार आठ गांवों में 249 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करेगी, इसके लिए 1374 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।
जाठिया देवी शिमला शहर से 14 और जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट से दो किलोमीटर की दूरी पर है। इस कारण सरकार का यहां नया शहर बसाने का प्लान है, लेकिन लोग इसके पक्ष में नहीं हैं।
एसआई टीम को भेजा वापस
जाठिया देवी में बागी पंचायत के आठ गांवों के लोग जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। गत दिनों सोशल इंपेक्ट (एसआइ) टीम यहां पहुंची थी तो लोगों ने गो बैक के नारे लगाए। इस दौरान एसडीएम शिमला ग्रामीण मनजीत शर्मा जन सुनवाई के लिए पहुंचे थे। लोगों ने उन्हें जमीन न देने का ज्ञापन भी सौंपा।
रोक दिया मंत्री का काफिला
लोगों के प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डा. कर्नल धनीराम का काफिला भी यहां से गुजर रहा था। ऐसे में लोगों ने उन्हें रोककर उन्हें भी सारी स्थिति से अवगत करवाया था।
एसडीएम के पास दर्ज करवाई आपत्तियां
लोगों ने एसडीएम शिमला ग्रामीण को भूमि अधिग्रहण को लेकर आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। एसडीएम शिमला ग्रामीण ने सोशल इंपेक्ट सर्वे की टीम को निर्देश दिए हैं कि वह सर्वे में लोगों की आपत्तियां दर्ज कर उन्हें रिपोर्ट दें।
क्या कहते हैं पंचायत जनप्रतिनिधि
बागी पंचायत के उपप्रधान देसराज का कहना है कि वह इस प्रोजेक्ट के लिए किसी भी हालत में गांवों को नहीं उजड़ने देंगे। बागी पंचायत के आंजी, चनान, शिलीबागी, कियारगी, पंटी, शिलड़ू, धनोखर और मझोला गांव की भूमि अधिग्रहण की तैयारी को लेकर ग्रामीणों में रोष बढ़ता जा रहा है।
आजीविका और भविष्य पर पड़ेगा गंभीर प्रभाव
लोगों का कहना है कि जमीन और मकानों का अगर अधिग्रहण होता है तो लोगों की आजीविका, घर-परिवार और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों के अनुसार भूमि उनके जीवन का मुख्य आधार है और बिना सहमति अथवा उचित समाधान के अधिग्रहण स्वीकार्य नहीं होगा।
