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हिमाचल में गवाह को मिलेगी पुलिस सुरक्षा, सरकार ने लागू की योजना; जिलास्तर पर प्राधिकरण करेगा खतरे का आकलन

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 03 Nov 2026 01:39 PM (IST)Updated: Tue, 03 Nov 2026 02:04 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश सरकार ने गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'हिमाचल प्रदेश गवाह संरक्षण योजना-2026' अधिसूचित की है।

हिमाचल में अब गवाह को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाएगी। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल में अब गवाह को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाएगी। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. हिमाचल में गवाह संरक्षण योजना-2026 हुई अधिसूचित।

  2. गवाहों को मिलेगी पुलिस सुरक्षा, पहचान रहेगी गोपनीय।

  3. जिला स्तर पर सक्षम प्राधिकरण करेगा खतरे का आकलन।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने हिमाचल प्रदेश गवाह संरक्षण योजना-2026 अधिसूचित कर दी है। इसके तहत गवाहों और उनके स्वजन को जान-माल, प्रतिष्ठा तथा सुरक्षा से जुड़े खतरों की स्थिति में संरक्षण दिया जाएगा। 

गंभीर मामलों में गवाह की पहचान गोपनीय रखने, पुलिस सुरक्षा, आवास बदलने और संचार व्यवस्था में बदलाव जैसे कदम उठाए जा सकेंगे। गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार यह योजना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 398 के तहत बनाई गई है।

अधिकारी करेंगे खतरे का आकलन

खतरे का आकलन संबंधित पुलिस अधीक्षक अथवा पुलिस उपअधीक्षक की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर होगा। इसमें धमकी की गंभीरता, विश्वसनीयता, धमकी देने वाले व्यक्ति की मंशा, उद्देश्य और उसे अंजाम देने के संसाधनों का भी आकलन किया जाएगा।

हर जिले में प्राधिकरण का होगा गठन

प्रत्येक जिले में एक सक्षम प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसकी अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे। पुलिस अधीक्षक अथवा पुलिस उपअधीक्षक सदस्य होंगे, जबकि जिला अभियोजन निदेशालय के उपनिदेशक सदस्य सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। 

पुलिस अधीक्षक अथवा पुलिस उपअधीक्षक की अध्यक्षता में गवाह संरक्षण प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। प्रकोष्ठ प्रत्येक गवाह के मामले में मासिक अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेगा।

गवाह को करना होगा आवेदन

गवाह संरक्षण प्राप्त करने के लिए संबंधित जिले के सक्षम प्राधिकरण के समक्ष निर्धारित प्रारूप-एक में आवेदन करना होगा। यह आवेदन उस जिले में दाखिल किया जाएगा, जहां अपराध हुआ है। आवेदन सदस्य सचिव के माध्यम से आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा। गवाह स्वयं, परिवार का सदस्य, उसका अधिवक्ता, जांच अधिकारी, थाना प्रभारी अथवा जेल अधीक्षक भी आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

5 दिन में होगा निर्णय

आवेदन मिलने के बाद सक्षम प्राधिकरण दो दिनों के भीतर पुलिस अधीक्षक अथवा संबंधित पुलिस उपअधीक्षक से खतरे के आकलन की रिपोर्ट मांगने का आदेश जारी करेगा। पुलिस को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट तैयार कर पांच कार्यदिवस के भीतर प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम प्राधिकरण को भी पांच कार्यदिवस के भीतर आवेदन पर निर्णय करना होगा।

अंतरिम सुरक्षा का भी प्रविधान

यदि गवाह या उसके परिवार को तत्काल खतरा है तो आवेदन पर अंतिम निर्णय होने तक भी अंतरिम सुरक्षा उपलब्ध करवाने का प्रविधान है। गवाह की सुरक्षा के लिए गवाह और आरोपित को जांच या सुनवाई के दौरान आमने-सामने आने से रोकना, ई-मेल और फोन काल की निगरानी, मोबाइल फोन नंबर बदलना अथवा गोपनीय नंबर उपलब्ध करवाना शामिल है। गवाहों की सुरक्षा के लिए राज्य गवाह संरक्षण कोष बनाने का प्रविधान किया है। इस कोष में राज्य सरकार के वार्षिक बजट से राशि उपलब्ध होगी।

खतरे के आधार पर गवाहों की तीन श्रेणियां

  • श्रेणी ए: ऐसे मामले जिनमें गवाह या उसके परिवार के सदस्यों की जान को खतरा हो।
  • श्रेणी बी: ऐसे मामले जिनमें गवाह या उसके परिवार की सुरक्षा, प्रतिष्ठा अथवा संपत्ति को खतरा हो।
  • श्रेणी सी: ऐसे मामले जिनमें गवाह या उसके परिवार को प्रताड़ना, धमकी या डराने की आशंका हो तथा उनकी प्रतिष्ठा या संपत्ति प्रभावित हो सकती हो।

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