हिमाचल में खूंखार अपराधियों के लिए बनेगी हाई सिक्योरिटी जेल, शीत मरुस्थल लाहुल-स्पीति में होंगे शिफ्ट
हिमाचल प्रदेश में खूंखार अपराधियों और गैंगस्टरों की दादागिरी रोकने के लिए लाहुल-स्पीति में एक उच्च सुरक्षा वाली जेल बनाने की तैयारी है।

हिमाचल प्रदेश के कुख्यात कैदियों को अलग जेल में शिफ्ट किया जाएगा। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
खूंखार अपराधियों को सामान्य कैदियों से अलग रखा जाएगा।
लाहुल-स्पीति में उच्च सुरक्षा वाली जेल बनेगी।
जेलों में अनुशासन और सुरक्षा मजबूत होगी।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश की जेलों में बंद गैंगस्टरों, खूंखार अपराधियों और भाड़े के शूटरों की दादागिरी पर लगाम लगाने के लिए अब उन्हें सामान्य कैदियों से अलग रखने की तैयारी है। जेलों के भीतर दबदबा कायम कर दूसरे कैदियों को डराने-धमकाने, उनके साथ मारपीट करने और उगाही की कोशिशों जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाहुल-स्पीति में उच्च सुरक्षा वाली जेल विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
इस जेल में कुख्यात अपराधियों को अलग-अलग सेल में रखने की व्यवस्था होगी, ताकि वे दूसरे कैदियों पर अपना प्रभाव न बना सकें और जेल के भीतर अनुशासन कायम रखा जा सके।
कुख्यात अपराधी दूसरे कैदियों पर बनाते हैं दबाव
जेल में बंद कुछ कुख्यात अपराधी अपने आपराधिक प्रभाव और बाहरी नेटवर्क के दम पर दूसरे कैदियों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे कैदियों की मौजूदगी से सामान्य बंदियों की सुरक्षा और जेल प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी होती है। कई बार कैदियों के बीच मारपीट, धमकाने और वसूली की कोशिशों जैसी घटनाएं जेल प्रबंधन के लिए परेशानी बनती हैं।
ऐसे में खतरनाक अपराधियों को सामान्य कैदियों से अलग रखने की व्यवस्था को जेलों में अनुशासन और सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
निगरानी और नियंत्रण होगा आसान
लाहुल-स्पीति के केलंग या आसपास प्रस्तावित उच्च सुरक्षा जेल में ऐसे कैदियों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था विकसित करने का उद्देश्य उनके आपसी संपर्क और दूसरे बंदियों पर प्रभाव को सीमित करना होगा। इससे सामान्य कैदियों को भय और दबाव से मुक्त वातावरण मिल सकेगा। साथ ही जेल प्रशासन के लिए कुख्यात अपराधियों की निगरानी और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखना भी आसान होगा।
डीजीपी जेल ने भेजा डीसी को पत्र
महानिदेशक कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं हिमाचल प्रदेश की ओर से एक अक्तूबर 2026 को उपायुक्त लाहुल-स्पीति को पत्र लिखकर 60 से 70 बीघा सरकारी जमीन की तलाश का आग्रह किया गया है।
जेलों में क्षमता से अधिक कैदी
इस प्रस्ताव के पीछे प्रदेश की जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या भी एक बड़ी वजह है। प्रदेश की जेलों की कुल स्वीकृत क्षमता 2,580 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में इनमें 3,392 कैदी बंद हैं। यानी जेलों में निर्धारित क्षमता से 812 अधिक कैदी रखे गए हैं। कुल क्षमता के मुकाबले कैदियों की संख्या लगभग 131.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
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