यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मंत्रियों व विधायकों की सिफारिश पर नहीं होगा तबादला: हाईकोर्ट
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार के विभागों के निदेशक या विभाग प्रमुख तबादला मामले में मंत्रियों व विधायकों को कोई अधिमान न दें।

शिमला, जागरण संवाददाता। सरकारी कर्मचारियों को मंत्रियों व विधायकों का खौफ रहता है कि कहीं उनका तबादला न कर दें। प्रदेश उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि अब किसी भी कर्मचारी का तबादला मंत्रियों के साथ विधायकों व राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की सिफारिश पर नहीं होगा। उच्च न्यायालय ने अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के एक कर्मचारी प्रेम ठाकुर केतबादला मामले की सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार के विभागों के निदेशक या विभाग प्रमुख तबादला मामले में मंत्रियों व विधायकों को कोई अधिमान न दें।
अधिकारी स्वतंत्र हैं व विभागाध्यक्ष नेताओं के तबादलों से संबंधित सिफारिश को नकार सकते हैं। ऐसा करने का उन्हें अधिकार है। ऐसे मामले की सुनवाई के बाद उच्चन्यायालय ने प्रेम ठाकुर का तबादला शिमला से कुल्लू करने का आदेश निरस्त कर दिया। उच्च न्यायालय के न्यायधीश धर्मचंद चौधरी व न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया। प्रेम ठाकुर का तबादला शिमला से कुल्लू कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह के डीओ नोट के बाद मुख्यमंत्री के डीओ पर विभाग ने किया था। विधायक की सिफारिश को मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया। इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से कर्मचारी का तबादला करने के लिए डीओ नोट गत 23 मई को जारी हुआ। इस पर कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में दस्तक दी। ट्रिब्यूनल ने कर्मचारी को विभागीय सचिव के समक्ष अपना रिप्रेजेंटेशन देने को कहा।
प्रभावित कर्मचारी इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय पहुंचा। मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि किस कर्मचारी को कहां तैनाती देनी है, यह तय करना कार्यपालिका का जिम्मा है। पार्टी कार्यकर्ताओं व ऐसे लोगों जिनका कार्यपालिका अथवा विधायिका से कोई सरोकार नहीं है, उनके कहने पर कोई तबादला नहीं किया जाना चाहिए। विधायिका अथवा कार्यपालिका से सरोकार न रखने वाले लोगों को किसी भी कर्मचारी की तैनाती अथवा तबादले को लेकर सिफारिश करने का कोई अधिकार नहीं है।
अपनी शक्तियों से पीछे नहीं हट सकता ट्रिब्यूनल
खंडपीठ ने आदेश में कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ऐसे मामलों में विभागीय सचिव के समक्ष रिप्रेजेंटेशन करने को कहकर भी अपनी शक्तियों से पीछे नहीं हट सकता है। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के कर्मचारी के तबादले के मामले में भी ट्रिब्यूनल ने कर्मचारी को विभागीय सचिव के समक्ष रिप्रेजेंटेशन करने को कहा था।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद छह महीने तबादलों का दौर देखने को मिलता है। न्यायालय के आदेश के बाद ऐसे तबादलों पर नकेल कसेगी। इसके साथ ही सालभर होने वाले तबादलों पर भी रोक लगने की उम्मीद है।
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