हिमाचल मंत्रिमंडल विस्तार के क्या बदल गए समीकरण, CM की पसंद बनाम क्षेत्रीय संतुलन के बीच कौन बनेगा मंत्री?
हिमाचल मंत्रिमंडल में खाली पद को लेकर कुल्लू बनाम कांगड़ा का समीकरण अहम हो गया है। मुख्यमंत्री की पसंद सुंदर ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
हिमाचल मंत्रिमंडल में एक खाली पद भरने की कवायद तेज।
कुल्लू के सुंदर ठाकुर और कांगड़ा के बीच दावेदारी का पेच।
मुख्यमंत्री की पसंद बनाम क्षेत्रीय संतुलन पर सबकी निगाहें।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल में खाली पड़े एक पद को भरने की कवायद में अब कुल्लू बनाम कांगड़ा का समीकरण अहम हो गया है। लंबे समय से मंत्रिपद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे कुल्लू के विधायक सुंदर ठाकुर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के साथ दिल्ली दौरे पर रहे। मुख्यमंत्री कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे। ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ सुंदर ठाकुर की मौजूदगी ने मंत्रिपद को लेकर फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
दूसरी ओर कांगड़ा से भी दावेदारी सामने आने के बाद अंतिम फैसले को लेकर पेच बढ़ गया है। सुंदर ठाकुर की सक्रियता पिछले कुछ महीनों में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में लगातार दिखाई दी है। स्वतंत्रता दिवस पर जिलास्तर के कार्यक्रम में उन्हें मुख्य अतिथि बनाया गया था।
मुख्यमंत्री भी कई मौकों पर सुंदर ठाकुर को मंत्री बनाए जाने की बात कह चुके हैं। यही वजह है कि मंत्रिपद के लिए उनका नाम लंबे समय से सबसे आगे माना जाता रहा है।
कांगड़ा के प्रतिनिधित्व का सवाल भी हाईकमान के सामने
हालांकि, हाल के दिनों में दिल्ली में कैबिनेट विस्तार को लेकर हुई चर्चाओं के बाद राजनीतिक समीकरण बदले हैं। कांगड़ा से मंत्रिपद की दावेदारी मजबूत होने के बाद अब फैसला केवल मुख्यमंत्री की पसंद तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने का सवाल भी पार्टी हाईकमान के सामने है। ऐसे में सुंदर ठाकुर के नाम पर मुहर लगती है या क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से कांगड़ा को तरजीह मिलती है, इस पर सबकी निगाहें हैं।
मुख्यमंत्री की पसंद बनाम क्षेत्रीय संतुलन
सुंदर ठाकुर के पक्ष में सबसे बड़ा आधार मुख्यमंत्री सुक्खू की पैरवी मानी जा रही है। मुख्यमंत्री कई बार सार्वजनिक रूप से उनके नाम का समर्थन कर चुके हैं। दूसरी ओर कांगड़ा की दावेदारी को नजरअंदाज करना भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। विधानसभा में कांगड़ा का प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण होने के कारण वहां से मंत्री बनाने की मांग लगातार राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी हुई है।
मंत्रिपद का फैसला कुल्लू और कांगड़ा दोनों जिलों में कांग्रेस के भीतर नए समीकरण बना सकता है। यही कारण है कि सुंदर ठाकुर के दिल्ली दौरे के बाद मंत्रिपद की चर्चा ने फिर जोर पकड़ लिया है। अब फैसला मुख्यमंत्री और कांग्रेस हाईकमान के बीच होने वाली बातचीत पर टिका है।
