यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 16, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सरकार ने मांगी जानकारी; 65 लोगों के केस वापस लेना चाहती है सरकार
विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के मामले में सरकार से मांगी जानकारी

HighLights
- सरकार ने दस जिलों में चल रहे 65 मामलों को वापस वापस लेना चाहती है सरकार।
- सीएम व डिप्टी सीएम सहित अन्य विधायकों पर दर्ज है मामले।
- अब तक केवल सात मामलों को निपटाया गया।
जागरण संवाददाता, शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा माननीय विधायकों अथवा सांसदों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों (Cases against MLA in Himachal) को वापिस लेने से जुड़े मामले में अहम जानकारियां तलब की है। कोर्ट ने उन विधायकों अथवा सांसदों से जुड़े मामलों के आरोप पत्रों की प्रतिलिपियां मांगी है जिनके मामले सरकार वापस लेना चाहती है।
65 अभियोगों को वापस लेने की मांगी अनुमति
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के गृह विभाग ने कोर्ट से माननीयों के खिलाफ ऐसे 65 अभियोगों को वापस लेने की अनुमति मांगी है जो सरकार के अनुसार राजनीप्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा माननीय विधायकों अथवा सांसदों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापिस लेने से जुड़े मामले में अहम जानकारियां तलब की है। कोर्ट ने उन विधायकों अथवा सांसदों से जुड़े मामलों के आरोप पत्रों की प्रतिलिपियां मांगी है, जिनके मामले सरकार वापस लेना चाहती है।
मामला वापस लेने संबंधी राय पेश करने के आदेश दिए
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के गृह विभाग ने कोर्ट से माननीयों के खिलाफ ऐसे 65 अभियोगों को वापिस लेने की अनुमति मांगी है जो सरकार के अनुसार राजनीतिक द्वेष के कारण दर्ज किए गए थे। मुख्य न्यायाधीश एम एस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने सरकार से उक्त प्रत्येक मामले में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर द्वारा मामला वापिस लेने संबंधी राय भी पेश करने के आदेश दिए।
सरकार द्वारा दायर आवेदन के माध्यम से कोर्ट को बताया गया है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत अन्य विधायकों के खिलाफ प्रदेश के 10 जिलों की अदालतों में आपराधिक मामले चल रहे हैं। सरकार का कहना है कि विधायकों पर राजनीतिक द्वेष के कारण ये आपराधिक मामले दर्ज किए गए है। वर्तमान और पूर्व विधायक के खिलाफ दर्ज किए गए ये मामले राजनीतिक विरोध से जुड़े हैं।
अब तक सात मामले निपटे
आवेदन के माध्यम से अदालत को बताया गया है कि यह आवेदन किसी छुपे हुए उद्देश्य से दायर नहीं किया गया है। कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत विधायक और सांसद के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए विशेष न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया है। लेकिन अभी तक सिर्फ सात मामलों का निपटारा ही किया गया है।
अब मामले पर सुनवाई छह दिसंबर को होगी
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अनुपालना करते हुए हाईकोर्ट ने विशेष अदालतों का गठन किया है और आदेश दिए हैं कि वर्तमान और पूर्व विधायकों और सांसदों के खिलाफ दर्ज मामलों को शीघ्रता से निपटाया जाए। मामले पर सुनवाई 6 दिसंबर को निर्धारित की गई है। तिक द्वेष के कारण दर्ज किए गए थे। मुख्य न्यायाधीश एम एस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने सरकार से उक्त प्रत्येक मामले में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर द्वारा मामला वापिस लेने संबंधी राय भी पेश करने के आदेश दिए।
सीएम व डिप्टी सीएम सहित अन्य विधायकों पर दर्ज है मामले
सरकार द्वारा दायर आवेदन के माध्यम से कोर्ट को बताया गया है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत अन्य विधायकों के खिलाफ प्रदेश के 10 जिलों की अदालतों में आपराधिक मामले चल रहे हैं। सरकार का कहना है कि विधायकों पर राजनीतिक द्वेष के कारण ये आपराधिक मामले दर्ज किए गए है। वर्तमान और पूर्व विधायक के खिलाफ दर्ज किए गए ये मामले राजनीतिक विरोध से जुड़े हैं।
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आवेदन के माध्यम से अदालत को बताया गया है कि यह आवेदन किसी छुपे हुए उद्देश्य से दायर नहीं किया गया है। कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत विधायक और सांसद के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए विशेष न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया है। लेकिन अभी तक सिर्फ सात मामलों का निपटारा ही किया गया है।
