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'नियम नहीं बना सकती न्यायपालिका', हाई कोर्ट न्यायाधीशों के सामने बोले CM सुक्खू; 5 लाख कॉस्ट देकर मनाना पड़ा स्वतंत्रता दिवस

By Rohit Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 11 Oct 2026 06:04 PM (IST)

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने न्यायपालिका के दायरे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालतें नियम नहीं बना सकतीं, केवल सरकार की गलतियों को ठीक कर सकती हैं।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षा समारोह में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षा समारोह में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

HighLights

  1. न्यायपालिका नियम नहीं बना सकती, केवल गलतियां सुधार सकती है।

  2. कर्मचारियों के वित्तीय लाभ पर अदालती फैसलों से बढ़ा बोझ।

  3. कांगड़ा और मंडी में दो नई NDPS अदालतें खुलेंगी।

जागरण संवाददाता, शिमला। शिमला में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के साथ मंच साझा करते हुए न्यायपालिका के दायरे को लेकर बड़ी बात कह दी। मुख्यमंत्री हिमाचल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावलिया के सामने हाई कोर्ट के कर्मचारियों और सरकारी स्कूलों के मैदान के इस्तेमाल को लेकर आए फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार से कोई गलती होती है, तो न्यायालय उसे ठीक करता है, लेकिन न्यायालय नए नियम नहीं बना सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के 80 साल बाद स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए सरकार को 5 लाख रुपये चुकाने पड़े। मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय यानी विधि विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में यह बात कही। 

कर्मचारियों को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर बोले मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश के कुल खजाने का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च होता है, जिसे कम करना आज की जरूरत है। कोई भी चुनी हुई सरकार अपने कर्मचारियों को उनके वित्तीय लाभों से वंचित नहीं रखना चाहती। खजाने की स्थिति का ध्यान रखना भी आवश्यक है, लेकिन कई बार अदालतों के ऐसे आदेश आते हैं, जिनसे भर्ती नियमों से जुड़े मामले प्रभावित होते हैं।

भर्ती नियमों को रद्द नहीं किया जाता, लेकिन कई बार भर्ती नियमों से बाहर जाकर भी वित्तीय लाभ देने के फैसले हो जाते हैं, जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

ऐसा ही एक मामला वर्ष 2003 का है, जब तत्कालीन सरकार ने फैसला किया था कि अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और इंक्रीमेंट नहीं मिलेंगे। लेकिन करीब 20 साल बाद अदालत ने वित्तीय लाभ देने का फैसला सुनाया, जबकि भर्ती नियमों में ऐसा कोई प्रविधान नहीं था और आज भी नहीं है। ऐसे फैसलों से सरकार के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।

कांगड़ा व मंडी में खुलेंगी नई अदालतें

मुख्यमंत्री सुक्खविंद्र सिंह सुक्खू ने मंडी और कांगड़ा जिला में एनडीपीएस के मामलों के निपटाने के लिए 2 नई अदालतें खोलने का एलान किया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षा समारोह में बतौर मुख्य अतिथि यह घोषणा की है।

मुख्यमंत्री सुक्खविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मौके पर ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को बधाई दी और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की बढ़ती चुनौती से निपटने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत मामलों को देखने के लिए कांगड़ा और मंडी में दो नई अदालतें बनाई जाएंगी, जिससे ड्रग्स से जुड़े अपराधों के खिलाफ़ संस्थागत कार्रवाई मज़बूत होगी। 

कर्मचारियों को देय वित्तीय लाभों से वंचित नहीं रखना चाहती सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी निर्वाचित सरकार अपने कर्मचारियों को उनके देय वित्तीय लाभों से वंचित नहीं रखना चाहती, लेकिन राज्य सरकार को वित्तीय संसाधनों और राजकोषीय दायित्वों का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनहित, नियमों और राज्य की वित्तीय स्थिति के बीच संतुलन बनाए रखना शासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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