शिमला, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नौ मार्च को पहला बजट पेश करेंगे। बजट सत्र के संदर्भ में अधिसूचना वीरवार को जारी कर दी गई है। इसके तहत छह मार्च को बजट सत्र शुरू होगा व पांच अप्रैल तक चलेगा। 17 से 25 मार्च तक सत्र के दौरान अवकाश रहेगा। इस दौरान 17 बैठकें होंगी। प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व राजनीतिकदक्षता का प्रमाण देखने को मिलेगा।

अधिसूचना के मुताबिक सत्र के पहले दिन वित्तीय वर्ष 2017-18 का अनुपूरक बजट पेश होगा। आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नौ मार्च को पेश करेंगे। आमतौर पर वित्त विभाग मुख्यमंत्री अपने पास रखते हैं। प्रदेश सरकार के पहले बजट सत्र के दौरान दो दिन गैर सदस्य दिवस के तौर पर रखे गए हैं, जिसमें विधायक अपने हलके से जुड़े मामलों को उठा सकते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने उम्मीद जताई है कि बजट सत्र में प्रत्येक विधायक जनहित के मुद्दों को उठाएंगे। पहली बार चुनकर आए सभी विधायक भी अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को सदन में उठाएंगे। उनके लिए संसदीय प्रणाली में किस तरह से कानून बनता है और विधायी कार्य किए जाते हैं, यह अनुभव मिलेगा। अहम बात यह है कि नए विधायक प्रत्येक कानून और चर्चा में लाए जाने वाले विषयों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। 

वार्षिक योजना पर 21 को होगी चर्चा

हिमाचल की 6300 करोड़ की वार्षिक योजना को मंत्रियों से चर्चा के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ओके करेंगे। सरकार ने इसके लिए राज्य योजना बोर्ड का गठन किया है। वर्ष 2018-19 के लिए प्रस्तावित वार्षिक योजना पर 21 फरवरी को सचिवालय में मंथन होगा। बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ चर्चा करेंगे। इसके चलते सभी मंत्रियों को बैठक में मौजूद रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष की वार्षिक योजना की तुलना में आगामी वित्त वर्ष के लिए योजना के आकार में 600 करोड़ की वृद्धि प्रस्तावित की है। इसके लिए विधायक प्राथमिकता की बैठक 12 और 13 फरवरी को हो चुकी है। वार्षिक योजना में सामाजिक सेवा, परिवहन, कृषि व जल विद्युत को विशेष प्राथमिकता मिलने के आसार है। इसके अतिरिक्त अनुसूचित जाति उप-योजनाए, जनजातीय उप-योजना तथा पिछड़ा क्षेत्र उप-योजना के लिए व्यय की जाने वाली राशि प्रस्ताव किया जाएगा। विधायकों सहित आम जनता की तरफ से मिले सुझावों को क्रियान्वित किया जाएगा। पिछली बार वर्ष 2017-18 के लिए 5,700 करोड़ रुपए के वार्षिक योजना आकार को मंजूरी दी थी। इसमें सामाजिक सेवा क्षेत्र के लिए 2213 करोड़ रुपये तथा परिवहन एवं संचार के लिए 1073 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रस्ताव था।

तीसरी प्राथमिकता के रूप में कृषि एवं संबद्ध सेवा क्षेत्र के लिए 714 करोड़ रुपये तय गिए गए थे। विकास कार्यसूची में प्रमुख जल विद्युत क्षेत्र में चौथी प्राथमिकता के रूप में 683 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रस्ताव पेश किया गया था। इसी तरह अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए 1436 करोड़ रुपये जनजातीय उप.योजना के लिए 513 करोड़ रुपये तथा पिछड़ा क्षेत्र उप-योजना के लिए 70 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रस्ताव था। सत्तारुढ़ भाजपा की तरफ से चुनाव के समय लाए गए विजन डॉक्यूमेंट को सरकारी दस्तावेज बनाया है। इसके अनुसार दीर्घकालीन अवधि को ध्यान में रखकर भी कार्य योजना को तैयार किया जा सकता है। सरकार ने सालाना योजना को मंजूरी देने के लिए वीरवार को राज्य योजना बोर्ड का गठन किया है।

यह भी पढ़ें: प्राथमिकताएं लटकीं तो बख्शे नहीं जाएंगे अधिकारी: मुख्यमंत्री जयराम

मेरे दिल्ली दौरों से क्यों आए कांग्रेस को चक्कर: जयराम

 

Posted By: Babita

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप