यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 14, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कालका-शिमला रेल ट्रैक पर फिर दौड़ा 112 साल पुराना भाप इंजन
कालका-शिमला रेल ट्रैक पर एक बार फिर 112 साल पुराना भाप इंजन दौड़ा। इस रेल इंजन को यूके से आए ...और पढ़ें

शिमला [एएनआई]: कालका-शिमला रेल ट्रैक पर एक बार फिर 112 साल पुराना भाप इंजन दौड़ा। भाप के इंजन के साथ इस मार्ग की पुरानी यादें फिर ताजा हो गई। इस रेल इंजन को यूके से आए 30 पर्यटकों के दल की बुकिंग पर उत्तर रेलवे ने चलाया था। उत्तर रेलवे पर्यटकों को बुकिंग पर भाप इंजन की यात्रा करवा रहा है। यह भाप इंजन 112 साल पुराना है। कालका-शिमला रेल मार्ग काफी पुराना है तथा इस मार्ग को वर्ष 2008 में यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल किया गया था।
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सोमवार को इस रेल ट्रैक पर केसी 520 इंजन ट्रेन को लेकर दौड़ा। शिमला में पहली ट्रेन नौ नवंबर 1903 को पहुंची थी और उक्त इंजन इस ट्रैक पर 1907 में आया था। इस ट्रैक पर वर्ष 1970 तक भाप इंजन ही चलते थे। इसके बाद डीजल इंजन आने पर भाप इंजन बंद हो गए थे। लेकिन धरोहर के रूप में अब भी उत्तर रेलवे ने कुछ भाप इंजनों को संभाल कर रखा हुआ है। इनमें कुछ इंजनों को पर्यटकों की अच्छी बुकिंग पर इस ट्रैक पर चलाया जा रहा है।

ट्रेन में सफर कर रहे यूके के पर्यटक डेव ने बताया कि उनका भारत आने का एक मकसद यह भी था कि वह यहां नैरोगेज रेलमार्ग में पहाड़ों के बीच यात्रा करें और भाप के इंजन के साथ चलने वाली ट्रेन में यात्रा का आनंद उठाए।
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एक अन्य पर्यटक कीथ ने बताया कि उनका इस यात्रा में बेहतरीन अनुभव रहा है। गुजरे जमाने के रेल इंजन में यात्रा करने के साथ उन्हें होली उत्सव को देखने का भी मौका मिला। इंजन के चालक राजेंद्र कुमार ने बताया कि इस इंजन को चलाने का अपना अलग ही अनुभव है। कोयले से चलने वाला यह इंजन रोजाना 20 किलोमीटर की यात्रा करता है तथा इसकी गति भी 20-22 किलोमीटर प्रति घंटा की होती है। इसे विशेष बुकिंग पर ही उपलब्ध करवाया जा रहा है। विदेशी पर्यटक इसे खूब पसंद कर रहे हैं।