यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मनाली हाईवे पर एक और मुश्किल हुई खड़ी, पहाड़ दरकने से झलोगी टनल का साउथ पोर्टल धंसा
Manali Highway Tunnel damage मंडी जिले के झलोगी में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर बनी सुरंग का साउथ पोर्टल भूस्खलन के कारण ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, मंडी। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर मंडी जिले के झलोगी में बनी सुरंग का साउथ पोर्टल धंस गया है। इससे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की मुश्किल बढ़ गई हैं। यहां कई दिन से पहाड़ दरक रहा था। वीरवार रात भारी वर्षा व भूस्खलन के साथ आई चट्टानों और मलबे से पोर्टल का बड़ा हिस्सा धंस गया। इस सुरंग से वाहनों की आवाजाही पहले ही बंद थी।
पोर्टल धंसने से मार्ग को भी भारी क्षति पहुंची है। आने वाले दिनों में अगर पहाड़ दरकने का क्रम नहीं थमा तो पोर्टल पूरी तरह से बंद हो सकता है। एनएचएआइ ने इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है।
विशेषज्ञों की टीम अब जल्द ही निरीक्षण करेगी। इसके बाद पुनर्निर्माण कार्य आरंभ होगा। मंडी से मनाली तक यह मार्ग एनएचएआइ के लिए सिरदर्द बन गया है। यह मार्ग 2023 से प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है।
मंडी से टकोली के बीच पहाड़ दरका
मंडी से टकोली के बीच नौ मील, पंडोह कैंचीमोड़, झलोगी, दवाड़ा, औट शनि मंदिर, बनाला के बाद अब झीड़ी में पहाड़ दरकने से नई समस्या खड़ी हो गई है। रात को यहां अचानक पहाड़ दरकने से बड़ी बड़ी चट्टानें मार्ग पर आ गई थी। इससे मार्ग बाधित हो गया था। शुक्रवार को दिन भर ब्रेकर व मशीनों से चट्टानों को तोड़ने का प्रयास किया गया। जब सफलता हाथ नहीं लगी तो एनएचएआइ ने यहां नियंत्रित ब्लास्ट करने की अनुमति मांगी।
लगातार दरक रहे पहाड़
प्रशासन की ओर से स्वीकृति मिलने के बाद बड़ी चट्टानों को नियंत्रित विस्फोटक लगाकर तोड़ा गया। इसके बाद यहां मार्ग बहाल हुआ। स्थिति यह बन गई है कि अगर एक दिन मार्ग संवेदनशील स्थानों पर बहाल होता है। दूसरे दिन नए स्थान पर पहाड़ दरक जाता है। एनएचएआइ ने झलोगी, दवाड़ा व कैंचीमोड़ में मलबा हटा झीड़ी से मंडी की ओर विभिन्न स्थानों पर फंसे कुल्लू की ओर से आए मालवाहकों को निकालकर गंतव्य की ओर भेजा।
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मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी
पहाड़ से हुए भूस्खलन से झलोगी सुरंग के पोर्टल दो को भारी क्षति पहुंची है। पोर्टल का बड़ा भाग धंस गया है। मार्ग को भी नुकसान पहुंचा है। मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है।
-वरुण चारी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ मंडी।
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