IIT मंडी में हिमाचल के विद्यार्थियों को नेट और गेट में छूट, स्टार्टअप के लिए हर महीने 15000 रुपये मिलेंगे
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने बताया कि संस्थान ने हिमाचल के युवाओं के लिए अपने द्वार खोले हैं, जिससे छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

आईआईटी मंडी का परिसर और निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा।
HighLights
हिमाचल के छात्रों को गेट/नेट परीक्षा में छूट।
स्टार्टअप के लिए हर माह 15,000 रुपये की सहायता।
आपदा प्रबंधन और पहाड़ी कृषि पर विशेष शोध।
जागरण संवाददाता, मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में संस्थान ने हिमाचल के युवाओं के लिए अपने द्वार और अधिक खोले हैं। वर्ष 2022-23 से 2026-27 के बीच 571 हिमाचली छात्र आइआइटी मंडी से जुड़े हैं। यह पिछले पांच वर्षों के 159 छात्रों की तुलना में करीब 3.6 गुना है। इनमें 253 ने पीएचडी, 146 ने एमटेक शोध और 20 ने दोहरी डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश लिया है।
राज्य के सरकारी संस्थानों के योग्य स्नातकों को गेट और नेट से छूट का प्रविधान भी है। संस्थान के 834 कर्मचारियों में से 767, यानी लगभग 92 प्रतिशत, हिमाचल के हैं। संकाय सदस्यों की संख्या 2022 के मुकाबले तीन गुना होकर पांच से 15 हो गई है। कुल छात्र संख्या 103 प्रतिशत बढ़कर 4,082 पहुंच चुकी है।
आपदा प्रबंधन और शोध पर जोर
प्रो. बेहरा ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए 23.26 करोड़ रुपये के 14 विशेष शोध प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इनमें कांगड़ा और मंडी में भूस्खलन निगरानी, शिमला-मंडी-मनाली में बहु-खतरा आकलन और भूकंप सुरक्षा शामिल हैं। टाटा ट्रस्ट के सहयोग से 20 करोड़ रुपये की क्लाइमेट कंट्रोल और आपदा प्रबंधन गतिविधियां भी चल रही हैं। पहाड़ी कृषि और जलवायु-अनुकूल जल बुनियादी ढांचे पर काम में कैलिफोर्निया और अन्य देशों के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
सेंट्रल फार कंटिन्यूइंग एजुकेशन के जरिए 2,573 से अधिक हिमाचली प्रतिभागियों को एआइ, रोबोटिक्स, आइओटी और वोकेशनल स्किल्स का प्रशिक्षण दिया गया है। आइआइटी मंडी कैटालिस्ट ने 278 स्टार्टअप को समर्थन दिया है, जिनमें 59 हिमाचल के हैं।
स्टार्टअप के लिए हर माह 15000 रुपये
राज्य के सभी 12 जिलों में 36 प्री-ग्रामीण इनक्युबेशन सेंटर स्थापित करने की योजना पर काम हो रहा है। यंग इनोवेटर फैलोशिप के तहत छात्रों को तकनीक-आधारित स्टार्टअप विकसित करने के लिए हर माह 15,000 रुपये और मेंटरशिप दी जा रही है। नार्थ-साउथ कैंपस को जोड़ने के लिए 22 करोड़ रुपये की लागत से 3.6 किमी लंबी डबल-लेन सड़क और पुल बनाए गए हैं।
कचरे से ऊर्जा प्रणाली के जरिए रोज करीब 800 किलोग्राम सूखे कचरे को ईंधन में बदला जा रहा है, जिससे छात्रावास मेस में एलपीजी की खपत आधी हुई है। कचरे और गोबर से 20 किलोवाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है, जिससे मंडी शहर को भी आपूर्ति होगी।
उन्होंने पालमपुर में प्रस्तावित विस्तार पटल को समय की मांग बताया। संस्थान सेना की जरूरतों के लिए शोध कर रहा है और यहां ओलंपिक स्तर का स्वीमिंग पूल बनाए गए हैं। दिसंबर में 23 संस्थानों के प्रशिक्षुओं की अंतर-आइआइटी सांस्कृतिक प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।
कोइका प्रोजेक्ट के तहत विदेश से 30 मिलियन की ग्रांट मिल रही है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दो पहाड़ संस्थान को सौंपे तो उन्हें सोना उगलने वाला बनाया जा सकता है। इस अवसर पर रजिस्ट्रार केएस पांडे भी उपस्थित थे।