बेंगलुरु की चमक छोड़ हिमाचल की एकता और प्रवीण ने शुरू किया उद्यम, 600 से अधिक परिवारों को मिला रोजगार
बेंगलुरु की आरामदायक नौकरी छोड़ प्रवीण वर्मा और सोलन की एकता शर्मा ने हिमाचल में 'पहाड़न्स विलेज' की शुरुआत की। ...और पढ़ें

मंडी की प्रवीण और सोलन की एकता।
HighLights
प्रवीण और एकता ने आरामदायक नौकरी छोड़ शुरू किया 'पहाड़न्स विलेज'।
हिमाचल में 'पहाड़न्स विलेज' से 600 से अधिक परिवार लाभान्वित।
स्थानीय कला, संस्कृति और ग्रामीण पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा।
हंसराज सैनी, मंडी। सुविधाओं से भरी दुनिया और बड़े शहरों की चकाचौंध के बीच अक्सर हमारी जड़ें छूट जाती हैं लेकिन देवभूमि हिमाचल की दो बेटियों मंडी जिले के सराज क्षेत्र के बगस्याड़ की प्रवीण वर्मा और सोलन की फैशन डिजाइनर एवं माडल एकता शर्मा ने साबित कर दिया है कि अगर दिल में अपनी माटी के प्रति सच्चा प्यार हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यह सिर्फ एक व्यवसाय की कहानी नहीं है, बल्कि सपनों को सच करने और अपनों के जीवन में उजाला भरने की भावनात्मक और प्रेरक दास्तान है।
साढ़े तीन वर्ष पहले प्रवीण वर्मा के पास वह सब कुछ था, जिसका सपना हर युवा देखता है। इंफोसिस जैसी नामी कंपनी में बतौर जीआइएस इंजीनियर काम कर रही थी। प्रवीण के पास बेंगलुरु की आरामदायक जिंदगी, एक बेहतरीन कारपोरेट नौकरी और सुरक्षित भविष्य था। लेकिन उनके भीतर कहीं एक इच्छा थी... हिमाचल के लोगों के लिए, यहां की आबोहवा में कुछ सार्थक करने की।
ढाई करोड़ की जमा पूंजी लगाई दांव पर
बिना किसी बाहरी फंडिंग के उन्होंने पूरी जमा-पूंजी (लगभग ढाई करोड़ रुपये) दांव पर लगा दी। पहाड़ों में जमीन खरीदी और जन्म हुआ पहाड़न्स विलेज का। इंस्टाग्राम पेज और बुनाई करने वाली लड़कियों के मात्र आठ समूहों से शुरू हुए सफर ने आज देश-विदेश के 5000 से अधिक ग्राहकों का भरोसा जीता है।

एकता शर्मा के जुड़ने से मिली नई उड़ान
लगभग 13 माह पहले सोलन की फैशन डिजाइनर एवं मॉडल एकता शर्मा सह-संस्थापक के रूप में टीम से जुड़ी। उनके आने से टीम को एक नई ऊर्जा, रचनात्मक दिशा और तेज रफ्तार मिली। प्रवीण का तकनीकी विजन और एकता का कलात्मक कौशल मिलकर पहाड़ों में महिला उद्यमिता की एक नई इबारत लिख रहे हैं।
पहाड़न्स विलेज से जुड़े 600 से अधिक परिवार
आज पहाड़न्स विलेज में 46 लोगों को सीधा रोजगार मिला है। आसपास के गांवों की 240 से अधिक लड़कियां ऊन कताई और बुनाई के काम से जुड़ी हैं। कुल मिलाकर 600 से अधिक परिवारों का भरोसा मुहिम के साथ जुड़ा है। खास बात यह है कि यहां का सारा स्टाफ स्थानीय है। जिन हाथों ने यहां के काटेज बनाए, वे आज भी पूरी शिद्दत से यहीं काम कर रहे हैं।

हिमाचल के पर्यटन को भीड़भाड़ वाले शहरों से निकालकर गांवों तक पहुंचाया गया है, जहां न बार है, न स्विमिंग पूल और न नेटफ्लिक्स, बल्कि डेरी, देवदार के महकते जंगल, खिलौना बनाना, मिट्टी के बर्तन गढ़ना, पारंपरिक नाटी और चूल्हे पर गांववालों के साथ पकने वाला खाना है।
संघर्ष की भट्टी में तपकर कुंदन बना सपना
राह कतई आसान नहीं थी। अपनी सारी जमा-पूंजी लगाने के बाद हर कदम बेहद सावधानी से उठाना पड़ा। दूरदराज के गांव, सीजन के बाद मेहमानों का कम होना और स्थानीय स्तर पर अविश्वास की दीवारों को पार करना आसान नहीं था। एक छोटे ठहराव के बाद नई ऊर्जा से फिर शुरुआत हुई। हर चुनौती ने इन्हें और मजबूत बनाया। आज इंटरनेट मीडिया पर पांच लाख से ज्यादा लोग इनसे जुड़े हैं। जेन जी पीढ़ी यहां सिर्फ ग्राहक बनकर नहीं, बल्कि एक सच्चे साझेदार के रूप में आती है। वे मोबाइल की आभासी दुनिया से दूर पहाड़ों की असली जिंदगी जीते हैं, हाथ से बनी चीजें चुनते हैं और इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
सपने की कीमत होती है और उसे चुकाने की हिम्मत भी। आरामदायक नौकरी और बड़े शहर की चमक छोड़कर जुनून के पीछे जाना आसान नहीं होता। अपनी जड़ों से जुड़ो, अपने हुनर पर यकीन रखो, और तब तक डटे रहो जब तक सपना असलियत न बन जाए।
-प्रवीण वर्मा, संस्थापक पहाड़न्स गिल्ड प्राइवेट लिमिटेड।
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