विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हिमाचल में बढ़ा पर्यटन दबाव: 669% बढ़ गए होमस्टे, पर्यटकों की आमद में भी इजाफा; SC समिति ने की नियंत्रण की सिफारिश

By Hansraj SainiEdited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 31 Oct 2026 01:26 PM (IST)Updated: Sat, 31 Oct 2026 01:54 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में पर्यटन के अनियंत्रित विस्तार और अंधाधुंध निर्माण ने राज्य की पारिस्थितिकी पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में पर्यटन का बढ़ता दबाव चिंता बढ़ा रहा है। मनाली में लगा ट्रैफिक जाम। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश में पर्यटन का बढ़ता दबाव चिंता बढ़ा रहा है। मनाली में लगा ट्रैफिक जाम। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हिमाचल में पर्यटन के अनियंत्रित विस्तार से पारिस्थितिकी संकट।

  2. एक दशक में होमस्टे में 669.7% की भारी वृद्धि।

  3. विशेषज्ञों ने ट्रैफिक नियंत्रण और वहन क्षमता आकलन की सिफारिश की।

जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन के अनियंत्रित विस्तार और अंधाधुंध निर्माण ने राज्य की पारिस्थितिकी पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। पर्यावरण से जुड़ी सीईसी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बीते एक दशक (2016 से 2026) के दौरान पंजीकृत होटलों की संख्या 2,784 से बढ़कर 5,311 (90.8% वृद्धि) हो गई है, जबकि पंजीकृत होमस्टे में 669.7% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्ष 2016 में जहां राज्य में मात्र 876 होमस्टे थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 6,743 तक पहुंच गया है।

पर्यटकों की आमद भी बढ़ी

सैलानियों की आवाजाही में भी अप्रत्याशित उछाल आया है। वर्ष 2016 में राज्य में कुल 1.84 करोड़ पर्यटक आए थे, जो 2025 में 68.81% की समग्र वृद्धि के साथ 3.11 करोड़ के पार पहुंच गए। इस कुल आंकड़े में धार्मिक पर्यटन की हिस्सेदारी सबसे प्रमुख रही है। 

वर्ष 2025 में दर्ज कुल पर्यटकों में से 1.66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु चिंतपूर्णी (ऊना), बाबा बालक नाथ (हमीरपुर) और कांगड़ा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में नतमस्तक हुए।

अटल टनल खुलने से लाहुल में भी बढ़े पर्यटक, विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस बेतहाशा भीड़ के कारण पहाड़ी क्षेत्रों की वहन क्षमता  जवाब दे रही है। अटल टनल खुलने के बाद शीत मरुस्थल लाहुल-स्पीति जैसे नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में सैलानियों और वाहनों की आवाजाही अत्यधिक बढ़ गई है। नतीजतन, ठोस कचरा प्रबंधन की विफलता, सीवरेज संकट, पेयजल किल्लत और भूस्खलन का जोखिम बढ़ गया है।

संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रैफिक नियंत्रण

सुप्रीम कोर्ट समिति की ओर से नियंत्रण की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में एनजीटी की ओर से रोहतांग दर्रे पर वाहनों की दैनिक सीमा 1200 तय करने का हवाला देते हुए सुझाव दिया गया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रैफिक नियंत्रण, कड़े निर्माण नियम और क्षेत्रवार वहन क्षमता का त्वरित आकलन अनिवार्य किया जाए, ताकि देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता और सुरक्षा को बचाया जा सके।

यह भी पढ़ें: 'जमीन के मालिकाना हक का विवाद होने से मुआवजा नहीं रोक सकते', हिमाचल हाई कोर्ट का फैसला; भवन बनाने वाला हकदार 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।