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हिमाचल: फर्जी IRDP सर्टिफिकेट से पा ली JE की नौकरी, विजिलेंस ने शुरू की जांच; माता-पिता रहे हैं सरकारी कर्मचारी

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 07 Jan 2026 04:59 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक व्यक्ति पर फर्जी IRDP प्रमाणपत्र का उपयोग कर जलशक्ति विभाग में कनिष्ठ अभियंता ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी का मामला सामने आया है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश में फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी का मामला सामने आया है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. मंडी में फर्जी IRDP सर्टिफिकेट से JE की नौकरी का आरोप।

  2. आरोपी के माता-पिता सरकारी सेवा में थे, पात्रता पर सवाल।

  3. विजिलेंस ने जांच शुरू की, प्रमाणपत्र की वैधता जांची जाएगी।

जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी पाने का मामला सामने आया है। गोहर उपमंडल के एक युवक पर आइआरडीपी (गरीबी रेखा से नीचे) के कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर जलशक्ति विभाग में कनिष्ठ अभियंता (जेई) पद पर नियुक्ति का आरोप लगा है।

वर्तमान में संबंधित अधिकारी लाहुल-स्पीति जिले के केलंग में तैनात बताया जा रहा है। कंढोल निवासी महेंद्र गुप्ता ने इस संबंध में विजिलेंस मंडी, प्रदेश के मुख्य सचिव तथा जलशक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता को शिकायत सौंपी है।

माता-पिता करते थे सरकारी नौकरी

आरोप लगाया गया है कि आरोपित अजय गुप्ता के माता-पिता दोनों सरकारी सेवा में रहे हैं। माता शिक्षा विभाग, जबकि पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति आइआरडीपी श्रेणी में आने पर संदेह जताया गया है।

सर्वेयर के रूप में कार्य कर चुका है आरोपित

शिकायतकर्ता के अनुसार अजय गुप्ता स्वयं भी 1992 से 2000 तक जलशक्ति विभाग में दैनिक भोगी सर्वेयर के रूप में कार्य कर चुका है। इस दौरान वह सुंदरनगर और करसोग मंडल में तैनात रहा। 

इसके बावजूद गत वर्ष उसका चयन आइआरडीपी कोटा के तहत कनिष्ठ अभियंता पद पर हो गया जो नियमों पर सवाल खड़े करता है।

विजिलेंस ने शुरू की जांच

मामले की शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच के दौरान आइआरडीपी प्रमाणपत्र की वैधता, पारिवारिक आय के दस्तावेज, सेवा रिकार्ड और चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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