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अटल टनल पर क्षमता से दोगुना हुआ ट्रैफिक, अब पहाड़ों पर मंडराने लगा खतरा; CEC की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद

By Hansraj SainiEdited By: Prince Sharma
Published: Wed, 04 Nov 2026 10:50 AM (IST)

अटल टनल और मनाली-लाहुल स्पीति कॉरिडोर पर पर्यटकों के अत्यधिक दबाव से पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को खतरा है।

अटल टनल पर क्षमता से दोगुना हुआ ट्रैफिक (फाइल फोटो)

अटल टनल पर क्षमता से दोगुना हुआ ट्रैफिक (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अटल टनल क्षमता से अधिक वाहनों का बोझ झेल रही है

  2. अत्यधिक ट्रैफिक से पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को खतरा

  3. सीईसी ने सख्त प्रवेश सीमा और वैकल्पिक मार्गों की सिफारिश की

हंसराज सैनी, मंडी। मनाली, लाहुल स्पीति कॉरिडोर और अटल टनल पर पर्यटकों का दबाव पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के लिए खतरा बन रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की रिपोर्ट के अनुसार अटल टनल निर्धारित डिजाइन क्षमता से अधिक वाहनों का बोझ झेल रही है।

संवेदनशील उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में भारी ट्रैफिक पर्यावरण, जल निकासी और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है। अटल टनल की मूल डिजाइन क्षमता लगभग 4,500 वाहन (3,000 हल्के और 1,500 भारी) प्रतिदिन की है। पीक सीजन में आंकड़ा 11,000 वाहनों को पार कर चुका है।

2024 में पीक डे ट्रैफिक 6,459 वाहन दर्ज किया था, जो 13 अप्रैल, 2025 को 10,356 वाहनों तक पहुंच गया। 27 जून, 2026 को पीक ट्रैफिक 6,584 वाहन रहा। यह सुरंग की निर्धारित क्षमता से काफी अधिक है।

तीन प्रमुख स्थानों अटल टनल, मनाली और खजियार का कुल संयुक्त पीक डे ट्रैफिक 2025 में 15,628 वाहनों के उच्च स्तर को छू गया था, जिसका मुख्य कारण अटल टनल कारिडोर पर वाहनों का अत्यधिक संकेंद्रण था। मनाली, खजियार का बदलता ट्रेंड: मनाली में पीक डे ट्रैफिक चार वर्ष में 3,950 से 4,360 वाहनों के बीच स्थिर रहा। जून 2026 में यह 3,953 दर्ज हुआ। इसका यह अर्थ नहीं कि पर्यटन का दबाव कम हुआ है। ट्रैफिक का रुख अटल टनल और आगे की ओर शिफ्ट हुआ है।

खजियार जैसे संवेदनशील उच्च पर्वतीय घास के मैदान क्षेत्र में पीक ट्रैफिक 2023 के 862 से बढ़कर 2026 में 1,012 वाहनों तक पहुंच गया, जो लगभग 17% की वृद्धि है और पारिस्थितिकीय दृष्टि से चिंताजनक है।

बड़े खतरे और पर्यावरण पर असर

अटल टनल के दोनों छोर व आसपास वाहनों की लंबी कतारों से पार्किंग, ठोस कचरा प्रबंधन और सीवेज सिस्टम चरमरा गए हैं। वाहनों का धुआं और जाम से बढ़ता प्रदूषण नाजुक पर्वतीय ढलानों, जलस्रोतों और जैव विविधता को प्रभावित कर रहा है।

बचाव के लिए उपाय और सिफारिश पर जोर

विशेषज्ञों ने गंभीर स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाने की संस्तुति की है। अटल टनल की निर्धारित क्षमता से अधिक गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रवेश सीमा तय की जाए।

क्षेत्र पर पड़ने वाले पारिस्थितिक दबाव का आकलन किया जाए। ट्रैफिक का दबाव एक ही गलियारे पर केंद्रित न रखकर वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया जाए।

अवैध पार्किंग पर प्रतिबंध लगाकर दोनों पोर्टल पर कचरा प्रबंधन और स्वच्छता प्रणालियों को ठीक करने की सिफारिश की है।

समिति ने 23 अक्टूबर को सौंपी रिपोर्ट 

समिति ने रिपोर्ट 23 अक्टूबर को सौंपी है। प्रदेश के परिस्थितिकी तंत्र में तेजी से हो रहे बदलाव पर संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीईसी ने 20 अगस्त को उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट इस माह होने वाली सुनवाई पर निर्णय लेगा।

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