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कांगड़ा घाटी रेलवे: नवरात्र में ट्रैक पर दौड़ी चार ट्रेन, शेड्यूल जारी; 35 रुपये में कर सकेंगे 164 किलोमीटर सफर

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 11 Oct 2026 04:48 PM (IST)

कांगड़ा घाटी रेलमार्ग पर पठानकोट-जोगेंद्रनगर नैरोगेज ट्रेन सेवा बरसात के बाद फिर से शुरू हो गई है। बैजनाथ-पपरोला स्टेशन से फिलहाल चार ट्रेनें चलेंगी, जिससे यात्रियों को राहत मिली है।

कांगड़ा घाटी रेलवे ट्रैक पर नवरा्र में ट्रेन सेवा शुरू हो गई है। जागरण

कांगड़ा घाटी रेलवे ट्रैक पर नवरा्र में ट्रेन सेवा शुरू हो गई है। जागरण

HighLights

  1. पठानकोट-जोगेंद्रनगर नैरोगेज रेलमार्ग पर ट्रेन सेवा बहाल।

  2. बैजनाथ-पपरोला से चार ट्रेनें निर्धारित समय पर चलेंगी।

  3. चक्की पुल क्षतिग्रस्त होने के चार साल बाद सेवा शुरू।

संवाद सहयोगी, बैजनाथ (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी रेल एक बार फिर पटरी पर उतर आई है। बरसात के बाद पठानकोट-जोगेंद्रनगर नैरोगेज रेलमार्ग पर रविवार से एक बार फिर ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो गई है। पहले नवरात्र के साथ रेल परिचालन बहाल होने से यात्रियों को राहत मिली है। हालांकि, अभी तक पहले की तरह सभी ट्रेनें शुरू नहीं हो पाई हैं।

बैजनाथ-पपरोला रेलवे स्टेशन से फिलहाल चार ट्रेनों का संचालन निर्धारित समय-सारणी के अनुसार किया जाएगा। इनमें दो ट्रेनें पठानकोट, एक ज्वालामुखी रोड और एक जोगिंद्रनगर के लिए रवाना होगी।

चक्की पुल गिरने के बाद थी अव्यवस्था

चक्की रेल पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्ष 2022 में पठानकोट तक रेल परिचालन बंद हो गया था। करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद इस रेल खंड पर दोबारा ट्रेनों की आवाजाही शुरू हुई है। चक्की रेल पुल पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि बैजनाथ पपरोला रेलवे स्टेशन को विकसित करने पर करीब सात करोड़ रुपये की लागत आई है। इसके बावजूद यात्रियों को अभी पहले की तरह पूरी रेल सेवा बहाल होने का इंतजार है।

बैजनाथ पपरोला से ट्रेनों की समयसारणी

बैजनाथ पपरोला रेलवे स्टेशन से सुबह आठ बजे जोगेंद्रनगर के लिए ट्रेन रवाना होगी। इसके बाद सुबह 10 बजे ज्वालामुखी रोड के लिए ट्रेन चलेगी। दोपहर 2:15 बजे और फिर 3:40 बजे पठानकोट के लिए ट्रेन रवाना होगी। इस तरह पठानकोट के लिए दोपहर में दो ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

पहले पठानकोट के लिए चलती थीं छह ट्रेनें

पहले बैजनाथ पपरोला और पठानकोट के बीच प्रतिदिन छह-छह ट्रेनों की आवाजाही होती थी। अब सीमित ट्रेनों का संचालन शुरू होने से यात्रियों को पहले जैसी सुविधा नहीं मिल पा रही है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी, जिससे दैनिक यात्रियों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी।

आम लोगों के लिए सस्ती और महत्वपूर्ण रेल सेवा

करीब 164 किलोमीटर लंबा पठानकोट-जोगेंद्रनगर नैरोगेज रेलमार्ग कांगड़ा घाटी की ऐतिहासिक पहचान है। ब्रिटिश शासनकाल में करीब एक करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से इस रेलमार्ग का निर्माण तीन वर्षों में किया गया था। इस मार्ग पर दो सुरंगें और करीब 950 छोटे-बड़े पुल हैं।

इस रेल सेवा की सबसे बड़ी विशेषता इसका कम किराया है। न्यूनतम किराया करीब 10 रुपये और अधिकतम करीब 35 रुपये तक बताया जाता है। कम किराये के कारण यह रेल आम लोगों, विद्यार्थियों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। पर्यटकों के लिए भी यह रेलमार्ग आकर्षण का केंद्र है।

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