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हिमाचल के हमीरपुर की बंजर जमीन पर लहलहाया मौसंबी का बागीचा, लुधियाना तक पहुंचा फल

Published: Sun, 18 Oct 2026 03:13 PM (IST)

धनेटा के कुसियार में एचपीशिवा परियोजना के तहत 8 हेक्टेयर बंजर भूमि पर मौसंबी का बागीचा लहलहा रहा है, जिससे ...और पढ़ें

एचपीशिवा परियोजना से बंजर जमीन पर मौसंबी का बागीचा बना।

 एचपीशिवा परियोजना से बंजर जमीन पर मौसंबी का बागीचा बना।

HighLights

  1. धनेटा के कुसियार में 8 हेक्टेयर बंजर भूमि पर मौसंबी

  2. एचपीशिवा परियोजना ने बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ

  3. किसान मोहिंद्र कुमार को 70 क्विंटल मौसंबी पैदावार की उम्मीद

रवि ठाकुर, हमीरपुर। वर्षों से झाड़ियों से घिरी बंजर जमीन पर कभी खेती की उम्मीद करना भी मुश्किल था, लेकिन अब उसी जमीन पर मौसंबी के फल बागवानों की मेहनत और कमाई की नई कहानी लिख रहे हैं।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह क्षेत्र धनेटा के गांव कुसियार में एचपीशिवा परियोजना के तहत तैयार मौसंबी का बागीचा अब फल देने लगा है। यहां पैदा हो रही मौसंबी स्थानीय बाजारों से निकलकर पंजाब के लुधियाना और जालंधर की मंडियों तक पहुंच रही है।गांव में करीब आठ हेक्टेयर बंजर भूमि पर लगभग साढ़े सात हजार मौसंबी के पौधे लगाए गए हैं।

1100 पेड़ों पर फल आने हुए शुरू

इनमें से करीब 1100 पौधों में फल आने शुरू हो गए हैं। प्रगतिशील बागवान मोहिंद्र कुमार के लिए इस बार का सीजन खास है। पिछले सीजन में उन्होंने करीब 30 क्विंटल मौसंबी बेचकर लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की थी।

इस बार उन्हें करीब 70 क्विंटल पैदावार की उम्मीद है। अब तक लगभग 60 क्विंटल मौसंबी की तुड़ाई कर चुके मोहिंद्र कुमार को दो लाख रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है।मोहिंद्र कुमार बताते हैं कि गांव में कई बीघा जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी।

मौंसबी के बगीचे से लहलहाए खेत

उस पर झाड़ियां उगी थीं और खेती नहीं होती थी। एचपीशिवा परियोजना के तहत बागवानी विभाग ने ग्रामीणों को मौसंबी का बागीचा लगाने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद जमीन से झाड़ियां हटाने, उसे समतल करने, गड्ढे बनाने और पौधारोपण करवाने में विभाग ने सहयोग दिया। धीरे-धीरे बंजर जमीन पर पौधे तैयार हुए और अब उनमें फल आने लगे हैं।कुसियार के एक अन्य बागवान शक्ति चंद शर्मा ने भी पिछले वर्ष मौसंबी के 150 पौधे लगाए हैं।

बेरोजरगार युवाओं के लिए सहारा

मोहिंद्र कुमार और शक्ति चंद शर्मा का कहना है कि यह परियोजना गांव के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का अच्छा माध्यम बन सकती है। युवाओं को नौकरी के लिए बाहर भटकने के बजाय अपने गांव में ही बागवानी के जरिये आय अर्जित करने का अवसर मिल सकता है।

बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि कुसियार में एचपीशिवा परियोजना के तहत आठ हेक्टेयर भूमि पर लगभग साढ़े सात हजार मौसंबी के पौधे लगाए गए हैं।

कई पौधों में फसल आनी शुरू हो चुकी है। विभागीय अधिकारी बागवानों को पौधों की देखभाल और परियोजना से जुड़ी सुविधाओं के बारे में नियमित मार्गदर्शन दे रहे हैं।

जल शक्ति विभाग की सिंचाई योजना तैयार होने के बाद बागीचे में ड्रिप सिंचाई सुविधा भी शुरू कर दी गई है। इससे पौधों की बेहतर देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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