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एशियाई खेलों के बाद ओलंपिक का सपना होगा पूरा, चंबा की सीमा से मिलेंगी नीता अंबानी; कड़े संघर्ष से पहुंची मुकाम पर

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 07 Oct 2026 03:10 PM (GMT+05:30)

एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली चंबा की सीमा से भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष नीता अंबानी मुलाकात करेंगी, जिससे उनके ओलंपिक सपने को साकार होने की उम्मीद है।

ओलंपिक संघ की अध्यक्ष नीता अंबानी और चंबा की सीमा। जागरण आर्काइव

ओलंपिक संघ की अध्यक्ष नीता अंबानी और चंबा की सीमा। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. नीता अंबानी मिलेंगी सीमा से, ओलंपिक सपने को मिलेगा सहारा।

  2. सीमा ने एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।

  3. संघर्षों से सफलता पाई, युवाओं को प्रेरणा और नशे से दूर रहने की सलाह।

जागरण टीम, चंबा। एशियाई एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली चंबा की सीमा का ओलंपिक का सपना पूरा होगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी सीमा से मुलाकात करेंगी। भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष नीता अंबानी ने 30 अक्टूबर को सीमा को मुलाकात के लिए आमंत्रित किया है। सीमा पहली बार नीता अंबानी से मुलाकात करेंगी। इस विशेष मुलाकात को लेकर सीमा व उसके स्वजन में खुशी का माहौल है।

नीता अंबानी ओलंपिक संघ की अध्यक्ष हैं, ऐेसे में सीमा के सपने के साकार होने की उम्मीद बंधी है। नीता अंबानी सीमा के सपने को पंख लगा सकती हैं। 

सीमा ने बेहद कठिन परिस्थितियों में संघर्ष कर सफलता पाई है। छोटी उम्र में पिता की मृत्यु के बाद मां ने मेहनत मजदूरी कर बेटी को पढ़ाया व आगे बढ़ाया। 

मुख्य अतिथि बनकर मैदान में पहुंची सीमा हुईं भावुक

देश का मान बढ़ाने वाली रेटा गांव की सीमा चंबा के प्रसिद्ध चौगान मैदान में मंगलवार को जिलास्तरीय अंडर-19 खेलकूद प्रतियोगिता के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मंच पर पहुंचीं। जिस मैदान की धूल में खेलकर वह बड़ी हुईं, उसी मैदान पर जब उनका मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत हुआ, तो पुरानी यादों को समेटे सीमा की आंखें भर आईं।

सीमा ने अपनी सफलता के पीछे के संघर्ष को बयां करते हुए अपनी मां के त्याग को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में कई लोगों का साथ रहा, लेकिन जो संघर्ष उनकी मां ने झेला है, मैं उसे जिंदगीभर नहीं भूल सकती। सीमा ने कहा, ' कास्य मेरी मंजिली नहीं, मेरा लक्ष्य देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है'।

कभी मां का हाथ पकड़कर यहां आती थीं...

मंच से बच्चों और चंबा के लोगों को संबोधित करते हुए सीमा बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने भारी आवाज़ में कहा, "आज इस चौगान में खड़े होकर मुझे अपना पूरा बचपन याद आ रहा है। वर्ष 2010 और 2012 में, मैं भी आप ही बच्चों की तरह इसी धूल-मिट्टी में खेला करती थी। एक दौर वह भी था, जब मैं अपनी मां की उंगली थामकर, उनका हाथ पकड़कर यहां मिंजर मेला देखने आती थी। उस वक्त इस मासूम दिल ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन इसी मैदान पर देश के लिए पदक जीतकर मुख्य अतिथि के रूप में खड़ी हो  पाऊंगी।"

बच्चों से एक अपील

सीमा ने बच्चों से अपील करते हुए कहा कि मैदान में जीत और हार दोनों होती हैं। जो खिलाड़ी हार गए हैं, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। हार के बाद रुकना नहीं है। दोगुनी मेहनत करनी है और अपने लक्ष्य को हासिल करना है। सीमा ने नशे को लेकर भी चिंता जताई। कहा कि स्कूलों के आसपास नशा नहीं बिकना चाहिए। हमारी युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही है। पुलिस, प्रशासन और स्कूल प्रबंधन को मिलकर इसे रोकना होगा। बच्चों से मेरी हाथ जोड़कर अपील है कि नशे से दूर रहें। सबसे पहले अच्छे इंसान बनें, उसके बाद खिलाड़ी या कर्मचारी बनना।

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