चंबा, रणवीर सिंह। साच के किसान रमेश शर्मा ने अपनी मेहनत के दम पर अपनी तकदीर बदल दी है। वर्तमान समय में जहां प्याज के दाम आसमान की ओर बढ़ रहे हैं वहीं रमेश में छह बिस्वा जमीन में महज 45 दिन में चार क्विंटल प्याज उगाकर चंबा शहर के लोगों को काफी हद तक राहत दी है।

रमेश अपनी प्याज की फसल को अब चंबा लाकर 45 और 50 रुपये  प्रति किलो बेच रहा है, जो बाजार से 25 से 30 रुपये तक सस्ता है। चंबा जिला की साच पंचायत के किसान रमेश शर्मा ने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के माध्यम से महज 45 दिन में चार क्विंटल प्याज तैयार किया है, जो कि चंबा बाजार में 45 से पचास रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। रमेश शर्मा लंबे सयम से अपने छोटे-छोटे खेतों में सब्जियां उगाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। साच पंचायत निवासी रमेश के गांव कुपाहड़ा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां न तो सिंचाई का कोई साधन है और न ही पानी उतनी मात्रा में होता है कि वह सिंचाई के लिए प्रयोग कर सके।

वर्षा का पानी खेतों में ही गड्ढों में एकत्रित कर लिया जाता है, जिसे बाद में सिचांई में प्रयोग किया जाता है। रमेश ने बताया कि उसने बीते बीस अगस्त को सोलन रेड खरीफ प्याज की फसल को खेतों में लगाया था, जिसे अक्तूबर में तैयार किया गया है। हालांकि इस प्याज के लिए सिंचाई के पानी की आवश्यकता नहीं होती है। क्योंकि जब इस प्याज को तैयार किया जाता है तो इस दौरान बरसात का समय होता है। जिससे बारिश के पानी से ही जरूरत हो पूरा किया जाता है। रमेश ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र से विशेष योजना के तहत उसने मुफ्त में बीज लिया था, जिसे तैयार किया गया। प्याज को सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की विधि से तैयार किया है। इसके अलावा रमेश ने अपने खेतों में टमाटर, गोभी, प्याज, मूली, भिंडी, मटर, बैंगन लगाए हैं। रमेश ने बताया कि उसका गांव काफी उंची जगह है जहां सिंचाई का कोई साधन नहीं है। केवल बारिश के पानी पर निर्भर होकर खेती की जाती है।

प्याज उगाने का लिया प्रशिक्षण

कुपाहड़ा में छह बिस्वा जमीन पर किसान रमेश शर्मा ने चार क्विंटल प्याज को तैयार किया है। जिसमें 14 क्र्यांरया बनाई गई। प्याज को तैयार करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सरू में तीन दिन के प्रशिक्षण के अलावा बीते सितंबर 2018 में छह दिनों का प्रशिक्षण कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में प्राप्त किया है। 

विभाग बताता है प्याज लगाने की विधि

वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र सरू डॉ. राजीव रैना ने बताया कि आमतौर पर नवंबर माह में प्याज खत्म हो जाता है। जिसके लिए विभाग ने चंबा में सोलन रेड खरीफ प्याज को तैयार करने के लिए किसानों को जागरूक किया है। इसमें काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इस फसल को दीवाली प्याज का नाम भी दिया गया है। इसके लिए किसानों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें किसानों को प्याज लगाने की विधि के बारे में बताया जाता है। प्याज बिलकुल आम प्याज की तरह तैयार किया जाता है। इस प्याज को तैयार करने में सिर्फ समय कम लगता है। यह हाईब्रिड का बीज है जिसे सोलन में तैयार किया है।

चंबा में भी सोलन रेड खरीफ प्याज को तैयार होने की संभानाओं को देखते हुए इसे तैयार किया जा रहा है। जिससे कुछ सफलता भी मिली है। उन्होंने बताया कि मार्च व अप्रैल माह में दो माह में इसकी पनीरी तैयार हो जाती है। जिसे सुखाकर पैक कर लिया जाता है जिसे 10 से 20 अगस्त में खेतों में लगाया जाता है। एक किसान पनीरी को तैयार करके अच्छे मूल्य पर दूसरे किसानो को भी बेच सकता है।

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क्या है सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती 

प्रदेश में रसायन खेती की जगह प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन के लिए सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाया जा रहा है। यह खेती जीरो बजट प्राकृतिक खेती देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र पर आधारित है। एक देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र से एक किसान तीस एकड़ जमीन पर जीरो बजट खेती कर सकता है। इस बारे में ग्रामीण किसानों को विशेष जानकारी दी जा रही है ताकि किसान रसायनिक खाद को छोड़कर देसी खाद को तैयार करे। इससे किसान बिना पैसे खर्च करके अपनी अजीविका बढ़ा सकता है।

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Posted By: Babita kashyap

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