'दाढ़ी तभी कटेगी जब ओलिंपिक में मेडल जीतूंगा', सुनील ने एशियाई खेल में जीता कांस्य; कभी छोड़ना चाहते थे पहलवानी
पहलवान सुनील कुमार ने एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता है, जो उनका लगातार दूसरा एशियाई खेल पदक है। उन्होंने ...और पढ़ें
HighLights
पहलवान सुनील कुमार ने एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता।
ओलिंपिक पदक जीतने तक दाढ़ी न कटवाने का लिया है प्रण।
यह उनका लगातार दूसरा एशियाई खेल कांस्य पदक है।
जागरण संवाददाता, गन्नौर (सोनीपत)। डबरपुर गांव के पहलवान सुनील कुमार ने करीब पांच साल पहले एक प्रण लिया था कि वे जब तक ओलिंपिक में पदक नहीं जीतेंगे, तब तक दाढ़ी नहीं कटवाएंगे।
ओलिंपिक पदक जीतने के लक्ष्य के साथ लिया गया उनका यह संकल्प अब उनकी पहचान का हिस्सा बन गया।
इसी संकल्प के साथ सुनील लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। एशियाई खेल में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रीको-रोमन शैली के 87 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता है।
फिलीपींस के पहलवान को 9-0 से हराया
कांस्य पदक के मुकाबले में सुनील ने फिलीपींस के पहलवान को 9-0 से हराकर मुकाबला अपने नाम किया। सुनील के पदक जीतने की खबर जैसे ही डबरपुर गांव पहुंची, ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्वजन और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई दी और मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। सुनील की मां अनीता देवी और भाई सुमित मलिक सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई।

भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवानों में शामिल
ग्रामीणों का कहना है कि सुनील ने अपनी मेहनत और लगातार बेहतर प्रदर्शन से गांव का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है। एशियाई खेल में यह सुनील कुमार का लगातार दूसरा कांस्य पदक है। इससे पहले उन्होंने हांगझोउ में आयोजित एशियाई खेलों में भी 87 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता था। इस उपलब्धि के साथ वह एशियन गेम्स में लगातार दो बार पदक जीतने वाले भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवानों में शामिल हो गए हैं।
एशियाई चैंपियनशिप में दर्ज किया शानदार रिकॉर्ड
- वर्ष 2019 में चीन में आयोजित सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में रजत
- वर्ष 2020 में नई दिल्ली में स्वर्ण
- 2022 में मंगोलिया, 2023 में कजाकिस्तान, 2025 में जार्डन और 2026 में किर्गिस्तान में आयोजित सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
- वर्ष 2023 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया
अब सुनील का लक्ष्य ओलिंपिक में देश के लिए पदक जीतना है। करीब पांच साल पहले लिया गया दाढ़ी नहीं कटवाने का उनका प्रण इसी लक्ष्य की याद दिलाता है।
पिता की चाह थी बड़ा भाई अश्विनी बने पहलवान
पहलवान सुनील उनके परिवार में वो तीन भाई और एक बहन हैं। पिता अश्विनी उनके बड़े भाई सुमित को पहलवानी में उतारना चाहते थे लेकिन उन्होंने पहलवानी करने से मना कर दिया। इसके बाद पिता ने सुनील को जींद के निडानी की स्पोर्ट्स अकादमी में भेजा। सुनील उस समय आठवीं कक्षा में थे। इसके कुछ महीनों बाद ही पिता अश्विनी की सड़क हादसे में मौत हो गई।

पिता की मौत के बाद मां ने बढ़ाया हौसला
पिता को खोने के बाद सुनील ने पहलवानी छोड़ने का मन बना लिया, लेकिन मां अनीता देवी ने बेटे सुनील को पिता सपना पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया। मां ने उसे वापस अखाड़े में भेज दिया। वहां जाने के बाद भी परिवार के सदस्य सुनील को खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहे, जिसके परिणामस्वरूप वह लगातार भारत का नाम रोशन करते आ रहे हैं।
