मेला देखने निकले, फिर कभी लौटकर नहीं आए... कैसे स्कूल के दो दोस्त बने टाइगर श्रॉफ पर हमले के मास्टरमाइंड
अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमले की योजना एक महीने पहले ही शुरू हो गई थी, जिसमें गांव बरोदा के अंकित और उसके नाबालिग सहपाठी शामिल थे।
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दो दोस्तों ने एक महीने पहले शुरू कर दिया था हमले पर काम।
HighLights
हमले की योजना एक माह पहले शुरू हुई थी।
अंकित और नाबालिग सहपाठी मेला देखने निकले थे।
मुंबई में टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग की।
जागरण संवाददाता, गोहाना। अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में हमले की तैयारी एक माह पहले ही शुरू हो गई थी। गांव बरोदा का अंकित और उसका नाबालिग सहपाठी लगभग भादो की दूज पर गांव में मेला देखने के लिए घर से निकले थे, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटे।
दोनों 12वीं कक्षा में साथ पढ़ते थे। गैंग की योजना के तहत अंकित, नाबालिग, गांव देवडू का रेहान और अन्य युवक मुंबई पहुंचे और वारदात को अंजाम दिया। गांव बरोदा में 15 सितंबर को मेला लगा था। इसी दिन अंकित अपने नाबालिग सहपाठी के साथ घर से निकला था।
मेले से नहीं लौटा अंकित
स्वजन को उम्मीद थी कि दोनों मेला देखने के बाद लौट आएंगे लेकिन वे घर नहीं पहुंचे। इसके बाद वे अपने साथियों से मिले। टाइगर श्रॉफ पर हमले की योजना को अंजाम देने के लिए अंकित, नाबालिग और गांव देवडू का रेहान समेत अन्य युवक कई दिन पहले मुंबई पहुंच गए थे।
वहां रेकी गई और हमले को अंजाम देने और वहां से भागने का रूट सर्वे किया गया। अंकित वारदात से एक दिन पहले मुंबई से वापस आ गया था जबकि नाबालिग, रेहान और अन्य युवक ने 18 अक्टूबर को श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग की थी।
रेहान की गिरफ्तारी के बाद अंकित हुआ गिरफ्तार
वारदात के अगले ही दिन मुंबई पुलिस ने नाबालिग और रेहान को राजस्थान से गिरफ्तार किया। इनकी गिरफ्तारी के बाद अंकित की भूमिका सामने आई। मंगलवार को मुंबई पुलिस गोहाना पहुंची और अंकित को भी गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई।
अब मुंबई पुलिस के साथ जिले की पुलिस भी अंकित, रेहान व नाबालिग के संपर्क में रहे अन्य युवकों की भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस ने बरोदा गांव के कुछ अन्य युवकों से भी पूछताछ की गई।
स्वजन ने तलाश की लेकिन सुराग नहीं लगा
कई दिन तक अंकित और नाबालिग स्कूल नहीं आया तो शिक्षकों द्वारा स्वजन से संपर्क किया गया। स्वजन से कहा कि दोनों को स्कूल भेजा जाए, नहीं तो उनका नाम काट दिया जाएगा। स्वजन ने चार-पांच दिन तक उनकी तलाश की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा।
