विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सोनीपत में रेत के लालच में खनन माफियाओं ने यमुना की धारा कर दी बेकाबू, 100 करोड़ का जाजल रेनीवेल प्रोजेक्ट खतरे में

Published: Sat, 18 Apr 2026 01:00 PM (IST)

अवैध रेत खनन के कारण यमुना नदी ने अपना रास्ता बदल दिया है, जिससे सोनीपत का 100 करोड़ का जाजल ...और पढ़ें

गांव जाजल के पास कटाव कर रही यमुना की धारा और थोड़ी दूर दिखाई दे रहा रेनीवेल। जागरण

गांव जाजल के पास कटाव कर रही यमुना की धारा और थोड़ी दूर दिखाई दे रहा रेनीवेल। जागरण

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, सोनीपत। रेत के लालच ने यमुना को बेकाबू कर दिया है। बागपत में अवैध खनन की मार से नदी ने अपना स्वाभाविक रास्ता छोड़ दिया है और अब वह रौद्र रूप लेकर सोनीपत की ओर बढ़ रही है। हालात ऐसे हैं कि यमुना की धारा सीधे जाजल गांव के उस रेनीवेल प्रोजेक्ट को लीलने की ओर अग्रसर है, जो शहर की प्यास बुझाने का सबसे बड़ा सहारा है। पानी अब महज दो एकड़ की दूरी पर है और हर पल बढ़ता कटाव इस खतरे को और गहरा कर रहा है।

पूरे इलाके में मची दहशत

बागपत की ओर लाइसेंसी ठेकेदार द्वारा नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे खनन ने यमुना के बहाव को बदल दिया है। कच्चा रास्ता बनाकर धारा को सोनीपत की तरफ मोड़ दिया गया, जिससे अब पानी खेतों को काटता हुआ रेनीवेल की ओर बढ़ रहा है। नदी के इस बदले मिजाज ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है।

100 करोड़ के प्रोजेक्ट खतरा

100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार जाजल रेनीवेल प्रोजेक्ट अब सीधे खतरे की जद में है। यदि यमुना का पानी इसमें घुस गया, तो सोनीपत शहर की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है। इससे न केवल लाखों लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ेगा, बल्कि प्रशासन को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

यमुना का कटाव लगातार बढ़ता जा रहा

सिंचाई विभाग के एक्सईएन विनोद कुमार ने तीन अप्रैल को ही बागपत के जिला खनन अधिकारी को पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया था। उन्होंने चेताया था कि अगर अवैध खनन नहीं रुका तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यमुना का कटाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि रेनीवेल की सुरक्षा के लिए मौके पर कोई पुख्ता इंतजाम तक नहीं हैं। न तो कटाव रोकने के लिए स्टड बनाए गए हैं और न ही कोई अन्य सुरक्षात्मक कदम उठाए गए हैं। ऐसे में यमुना का हर बढ़ता कदम प्रोजेक्ट के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर रहा है।

इसका असर आसपास के गांवों पर भी साफ दिख रहा है। गढ़ मिरकपुर और जाजल के किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार कटाव में समा रही है, जिससे उनकी मेहनत और आजीविका दोनों पर संकट खड़ा हो गया है।

एक्सईएन विनोद कुमार के मुताबिक, बागपत प्रशासन को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। साथ ही रेनीवेल की सुरक्षा के लिए स्टड निर्माण की मांग भी भेजी गई है, जिसकी मंजूरी का इंतजार है।

फिलहाल, यमुना की बेकाबू धारा और प्रशासन की सुस्ती मिलकर एक ऐसे संकट को जन्म दे रही है, जो अगर समय रहते नहीं थमा, तो सोनीपत के लिए जलसंकट की बड़ी चेतावनी साबित होगा।

यह भी पढ़ें- निकाय चुनाव: कांग्रेस में सोनीपत-अंबाला के मेयर प्रत्याशी फाइनल, पार्षदों पर मंथन जारी; पूरी लिस्ट

यह भी पढ़ें- हरियाणा निकाय चुनाव: पंचकूला, अंबाला व सोनीपत में ‘झाड़ू’ सिंबल पर उतरेगी AAP, क्या होंगे मुद्दे?

यह भी पढ़ें- सोनीपत के मुनमुन फॉर्म हाउस में फंदे से लटके मिले फॉर्म हाउस संचालक और महिला के शव, हत्या की आशंका