नेवी छोड़ी, पकड़ी रेलवे और फिर एशियन गेम्स में जीता गोल्ड; पढ़िए हरियाणवी गबरू जयदीप दहिया की अनकही कहानी
भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता, जिसमें खरखौदा के सिसाना गांव के जयदीप दहिया भी ...और पढ़ें
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जयदीप दहिया। तस्वीर में सबसे बाएं
HighLights
भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
जयदीप दहिया ने नेवी छोड़कर रेलवे में नौकरी की, फिर स्वर्ण जीता।
प्रो कबड्डी लीग में हरियाणा स्टीलर्स की कप्तानी कर चुके हैं जयदीप।
संवाद सहयोगी, खरखौदा। एशियाई खेलों में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम के स्वर्ण पदक जीतते ही खरखौदा के सिसाना गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। भारतीय टीम ने शनिवार को फाइनल मुकाबले में ईरान को 40-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। टीम में सिसाना गांव के खिलाड़ी जयदीप दहिया भी शामिल हैं।
जयदीप की इस उपलब्धि पर परिवार में जश्न का माहौल है। उनके बड़े भाई दीपक ने बताया कि मुकाबला जीतने की खबर मिलते ही घर में खुशी छा गई और मिठाई बांटकर इस खुशी को साझा किया गया। जयदीप की उपलब्धि केवल परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव व दहिया खाप के लिए गर्व का विषय है।
दीपक ने बताया कि उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है, कोई सरकारी नौकरी नहीं थी। खेत में काम करते हुए परिवार ने जयदीप को खिलाड़ी बनते देखा है। ऐसे में खेल को करियर बनाकर जयदीप ने लगातार मेहनत की और अलग-अलग स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

दो साल तक नेवी में भी दी सेवा
जयदीप ने करीब दो साल तक नेवी में भी सेवा दी। इसके बाद नेवी से त्यागपत्र देकर रेलवे में नौकरी हासिल की। जयदीप प्रो कबड्डी लीग में हरियाणा स्टीलर्स टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। उनकी कप्तानी में टीम ने 11वें सीजन में खिताब अपने नाम किया था। राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिता में जयदीप ने हरियाणा की टीम का हिस्सा बनकर स्वर्ण पदक का 21 वर्ष का सूखा खत्म किया था।
दीपक ने बताया कि जयदीप की कबड्डी की शुरुआती मेहनत गांव में ही हुई। गांव के मैदान पर अभ्यास करते हुए उन्होंने खेल की बारीकियां सीखीं और धीरे-धीरे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। अब एशियाई खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनकी मेहनत का बड़ा परिणाम है।
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गोल्ड मेडल जीतने के बाद कबड्डी टीम
जयदीप की इस उपलब्धि के बाद गांव में भी खुशी का माहौल है। रिश्तेदार और ग्रामीण बधाई देने पहुंच रहे हैं। दीपक ने कहा कि जयदीप ने गांव से निकलकर जिस स्तर पर भारतीय टीम का हिस्सा बनकर स्वर्ण पदक जीता है, उससे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। उसके पदक लेकर लौटने पर भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा।

दादी बोली- तोड़ पाड़ दिया रै भाई
जयदीप के जैसे ही दूसरे देश की धरती पर भारत का तिरंगा फहराने की खबर दादी शांति देवी को मिली, तो खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि पोते नै तै तोड़ पाड़ दिया भाई। जयदीप दहिया की इस उपलब्धि पर उसके माता-पिता भी फूले नहीं समा रहे हैं। मां सुनीता व पिता कुलदीप का कहना है कि जो सपना जयदीप के साथ पूरे परिवार ने देखा था, वह पूरा हो रहा है। इसीलिए आज खुशी का ठीकाना नहीं है।
