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इस फेस्टिव सीजन मिलावटखोरों की खैर नहीं, अब एक्शन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी

Published: Fri, 06 Nov 2026 04:30 AM (IST)

त्योहारी सीजन में रेवाड़ी के खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने मिठाइयों में मिलावट रोकने के लिए कोसली और बावल क्षेत्र में दुकानों व गोदामों का निरीक्षण कर नमूने लिए।

इस फेस्टिव सीजन मिलावटखोरों की खैर नहीं (एआई जेनरेटेड इमेज)

इस फेस्टिव सीजन मिलावटखोरों की खैर नहीं (एआई जेनरेटेड इमेज)

ज्ञान प्रसाद, रेवाड़ी। त्योहारी सीजन में मिठाइयों में मिलावट करने वालों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम के सदस्य जांच कर रहे हैं। विभिन्न खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में मिलावट का संदेह होने पर नमूने लेकर जांच के लिए मधुबन भेज रहे हैं।

मिलावट का संदेह होने पर लिए गए नमूनों की रिपोर्ट समय पर नहीं आने से कानूनी कार्रवाई में देरी हो रही है। बृहस्पतिवार को कोसली क्षेत्र में और बुधवार देर शाम तक बावल क्षेत्र के विभिन्न मिठाई की दुकानों और गोदामों में जांच की गई।

सभी सैंपल भेजे गए प्रयोगशाला

खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार को देर शाम तक जांच करने के साथ ही नमूने लिए गए। इससे पहले बावल क्षेत्र में 16 दुकानों से विभिन्न प्रकार की मिठाइयों के सैंपल लिए गए। सभी सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी संदीप कुमार के नेतृत्व में टीम ने बिठवाना, करनावास, सुठाना, बनीपुर चौक और बावल क्षेत्र में दुकानों पर जांच की।

इस दौरान मिठाइयों की गुणवत्ता और उनमें मिलावट में संदेह होने पर नमूने लिए गए। बिठवाना गांव से दूध, खोवा और गुलाब जामुन के नमूने लिए गए, जबकि करनावास से बूंदी के लड्डू की जांच कर नमूने लिए गए।

सुठाना क्षेत्र से मावा बर्फी, पतीसा, डोडा बर्फी, मिल्क केक और रसगुल्ला के नमूने लिए गए। बनीपुर चौक से रसगुल्ला, मलाई बर्फी और बेसन के लड्डू के सैंपल लिए गए। बावल क्षेत्र में भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मिठाइयों की दुकानों की जांच की। यहां से मावा बर्फी, मावा, काजू कतली, गुलाब जामुन, बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू और रसगुल्ला सहित विभिन्न मिठाइयों के सैंपल लिए गए।

संदीप कुमार का कहना है कि सैंपल लैब में भिजवाने के साथ जल्द जांच रिपोर्ट भेजने का भी आग्रह किया गया है।

आमजन से भी सावधानी बरतने की अपील

जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार में मिठाइयों की डिमांड बढ़ने के साथ मिलावट के मामले ज्यादा आते हैं। ऐसे में आमजन को मिलावट की प्राथमिक पहचान करने की जरूरत है।

दूध में डिटर्जेंट, यूरिया और पानी, मावा में स्टॉर्च और वनस्पति घी, जबकि घी में पाम आयल, मिठाइयों को चमकीला बनाने के लिए एल्युमिनियम फायल का उपयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। शुद्ध मावा कठोर होता है। मावा में आयोडीन सोल्यूशन डालेंगे तो मिलावट होने पर उसका रंग बैंगनी हो जाएगा।

यदि मावा चखने पर कड़वा महसूस हो या फिर जीभ पर चिपकने लगे तो इसमें वनस्पति घी की मिलावट है। इसी प्रकार मिठाई को गर्म पानी में डालें, आयोडीन लें और इसे मिठाई वाले कटोरे में डाल दें। मिठाई घुलकर रंग बदलती है तो मिलावट है। मिलावट का संदेह हो तो टोल फ्री नंबर 1800112100 पर भी शिकायत कर सकते हैं।

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