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    अपना 'सोना' बचाने को फील्ड में उतरे चैंपियन, खेल में सिक्का जमाने वाले सितारे काट रहे गेहूं

    हरियाणा में लाॅकडाउन के बीच खेल के मैदान में जलवे दिखाने वाले चैंपियन खिलाड़ी खेतों में अपना हुनर दिखा रहे हैं। ये खेल के स्‍टार खेतों में गेहूं की कटाई कर रहे हैं।

    By Sunil Kumar JhaEdited By: Updated: Tue, 14 Apr 2020 03:30 PM (IST)
    अपना 'सोना' बचाने को फील्ड में उतरे चैंपियन, खेल में सिक्का जमाने वाले सितारे काट रहे गेहूं

    पानीपत, [विजय गाहल्याण]। गेहूं की फसल खेत में तैयार खड़ी है। गेहूं, जो हरियाणा के किसानों के लिए कनक है। यानी सोना। लॉकडाउन के कारण उसे काटने-सहेजने के लिए न कंबाइन उपलब्ध, न मजदूर। सो, अपना सोना बचाने के लिए किसान खेतों में उतर पड़े। और उनके साथ ही उतर पड़े फील्ड में सोना जीतने वाले उनके चैंपियन बेटे। खेल के मैदान के चैंपियनों ने खेतों में मोर्चा संभाल लिया है और गेहूं की फसल की कटाई कर रहे हैं।

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    कहते हैं- किसान का खून है जिस्म में, अपना सोना बरबाद नहीं होने देंगे

    सन् 2009 से 2014 तक जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लगातार गोल्ड मेडल जीतने वाले पानीपत के बिंझौल गांव के रहने वाले परविंद्र सिंह का मंत्र था-फेंक जहां तक भाला जाए। फिलवक्त उनका मंत्र है- दाना सभी सहेजा जाए। परविंद्र 2014 में चीन में हुई जूनियर एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं और 2015 में बेंगलुरु में ऑल इंडिया यूनिवसिर्टी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी वह सोना जीत कर लौटे थे।

     

    एथलीट परमिंद्र अपने खेत में गेहूं की कटाई करते हुए।

    74.23 मीटर भाला फेंकने का रिकार्ड रखने वाले परविंद्र कहते हैं- किसान का खून है इस जिस्म में, अपना सोना यूं ही नहीं बरबाद होनें देंगे। परविंद्र सिंह सिंह देश के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा के सीनियर हैं और रेलवे में टीटीई हैं। उनकी 10 फरवरी को ही शादी हुई है। तभी से घर पर हैं। रेलवे के कैंप में जाने वाले थे कि लॉकडाउन हो गया। कहते हैं, नौ साल में पहली बार इतने समय तक घर रह रहा हूं। फसल खेत में खराब हो रही थी। उसने पहली बार मां प्रेमलता, भाई भूपेंद्र और ममेरी बहनों के साथ मिलकर दो एकड़ गेहूं की फसल काट ली है। अब दो दिन बाद गेहूं निकाल लेंगे।

    दिन में एक घंटे जरूरतमंदों को भोजन पहुंचाने जाते हैं सुनील

    पानीपत के शिवाजी स्टेडियम के बॉक्सिंग कोच सुनील कुमार भी पत्‍नी सुनीता के साथ मिलकर गेहूं की कटाई में लगे हैं। वह पानीपत के सुताना गांव के रहने वाले हैं। ढाई साल की बेटी रुद्धाशी को पिता रामफल सिंह संभालते हैं। दिन में एक घंटे के लिए शिवाजी स्टेडियम में जरूरतमंदों को भोजन वितरित करने भी जाते हैं। वहां से सीधे खेत में पहुंचते हैं और फिर फसल काटने में जुट जाते हैं।

    इसी तरह डिस्कस थ्रो में नेशनल चैंपियन मोनू, एथलेटिक कोच का कोर्स कर चुके शहंशाह तूड़ी (भूसे) की ढुलाई कर रहे हैं। ये सारे खिलाड़ी संकट कर घड़ी में देश, राज्‍य और समाज के प्रति अपने दायित्‍व का निर्वहन करे रहे हैं। इस दौरान ये लॉकडाउन के नियमों का भी पालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी समाज और देश के प्रति जिम्‍मेदारी दिखाने का समय है।

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