हरियाणा में टीचर मनीषा ने आत्महत्या की या हत्या हुई? CBI फिर से करेगी जांच; कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट की खारिज
पंचकूला कोर्ट ने शिक्षिका मनीषा की मौत के मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी है। अब सीबीआई ...और पढ़ें

मनीषा के परिजनों की विरोध याचिका पर सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
पीड़ित परिवार को अदालत से बड़ी राहत।
मनीषा की मौत की दोबारा जांच के आदेश।
सुसाइड नोट, एफएसएल रिपोर्ट पर उठे सवाल।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा के भिवानी की शिक्षिका मनीषा की मौत के मामले में पीड़ित परिवार को अदालत से बड़ी राहत मिली है। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली परिजनों की विरोध याचिका पर सुनवाई करते हुए शनिवार को फैसला सुनाया है।
अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए फिर से जांच के आदेश जारी किए हैं। हालांकि अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी उन तथ्यों की दोबारा जांच करे जिन्हें पीड़ित परिवार की तरफ से उठाया गया है।
मृतका के परिजनों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता हर्ष मोहन सिंह ने सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग, एफएसएल रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े कई तथ्यों पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने अदालत में दलील दी थी कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मौत को आत्महत्या मानने के बजाय हत्या की आशंका की भी जांच होनी चाहिए। अब इस मामले में एक बार फिर से जांच की जाएगी, कि आखिर मनीषा की मौत की असल वजह हत्या है या आत्महत्या है।
112 पर काॅल के बाद भी नहीं मिला शव
परिजनों के वकील ने घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए दलील दी थी कि मनीषा के लापता होने के बाद डायल 112 पर काल की गई थी और परिवार ने भी उसकी तलाश की थी। जिस क्षेत्र में तलाश की जा रही थी, वह करीब 400 मीटर का था।
वहां आबादी होने के साथ रास्ता भी था, लेकिन किसी ने शव नहीं देखा। मनीषा 11 अगस्त 2025 को लापता हुई थी और 13 अगस्त को उसका शव भिवानी के सिंघानी गांव के पास खेतों में मिला था। बचाव पक्ष की ओर से इन परिस्थितियों को जांच के अहम बिंदु बताते हुए सवाल उठाए गए थे।
यह भी पढ़ें- हरियाणा के बहुचर्चित मनीषा हत्याकांड में CBI की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल, कोर्ट तय करेगी हत्या या आत्महत्या
सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग पर भी सवाल
अधिवक्ता हर्ष मोहन सिंह ने अदालत में दो सुसाइड नोट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परिजनों के अनुसार, एक नोट की हैंडराइटिंग मनीषा से मेल नहीं खाती थी, जबकि लैब की रिपोर्ट में इसे मैच बताया गया।
उन्होंने दूसरे सुसाइड नोट में डीएसपी का उल्लेख होने और उसकी जांच से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि हैंडराइटिंग, दवाओं और एम्स दिल्ली की रिपोर्ट से जुड़े तथ्यों की समुचित पड़ताल जरूरी थी।
जहर और गर्दन के निशान की जांच पर सवाल
परिजनों के वकील ने दलील दी कि एफएसएल रिपोर्ट में जहर खाने की पुष्टि नहीं हुई। उन्होंने गर्दन पर मिले निशानों को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इन पहलुओं की जांच में कमियां रही हैं।
उनका आरोप था कि सीबीआई ने स्वतंत्र रूप से सभी पहलुओं की गहराई से जांच करने के बजाय पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जांच की। परिजनों की ओर से अदालत में रखी गई दलीलों पर अदालत ने इन तथ्यों की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।