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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से 10000 करोड़ का नुकसान, बंद करनी पड़ी 24000 से ज्यादा फैक्ट्रियां

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:43 PM (IST)

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण नूंह और गुरुग्राम सहित हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली गुल रही। औद्योगिक इकाइयों ...और पढ़ें

त्योहारी सीजन पर 48 घंटे बिजली गुल रहने से औद्योगिक क्षेत्र को लगा 10,000 करोड़ का झटका।

त्योहारी सीजन पर 48 घंटे बिजली गुल रहने से औद्योगिक क्षेत्र को लगा 10,000 करोड़ का झटका।

HighLights

  1. बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से 48 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित।

  2. औद्योगिक इकाइयों को 10,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।

  3. त्योहारी सीजन में उत्पादन और पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के नूंह तथा गुरुग्राम में बिजली व्यवस्था प्राइवेट कंपनी के दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारी बुधवार रात दस बजे से हड़ताल पर थे। जिसके चलते बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई।

हरियाणा-एनसीआर के शहर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, नूंह, रेवाड़ी पलवल तथा नारनौल के अधिकांश हिस्सों रात भर अंधेरा रहा, बिजली की मांग करते हुए लोगों ने सड़क तथा बिजली सब स्टेशन पर प्रदर्शन किया, इसके बाद भी बृहस्पतिवार को शहरों के अधिकांश हिस्सों से लेकर औद्योगिक तथा ग्रामीण क्षेत्र में बिजली के लिए हाहाकार मचा। पेयजल के लिए भी लोग तड़प रहे थे। 

हालांकि, शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ बैठक के बाद बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने का एलान कर दिया है।

10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान

इस समस्या ने त्योहारी सीजन में छोटी औद्योगिक इकाई संचालकों की कमर तोड़ दी। गुरुग्राम, बावल, पलवल के पृथला, फरीदाबाद, सोनीपत, नूंह तथा सोहना के बीच स्थित करीबतीस हजार छोटी औद्योगिक इकाई बिजली पर ही निर्भर रहने वाली इकाई के संचालक को कर्मचारियों को अवकाश देना पड़ा। पहले इनके पास डीजल जेनसेट हुआ करते थे पर पिछले चार साल से ग्रेप के तहत लगने वाली पाबंदी से कंपनी संचालक जेनसेट हटा चुके हैं।

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औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों के मुताबिक करीब 24 हजार फैक्ट्री में कामकाज बंद होने से 10 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। हड़ताल के दूसरे दिन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत फीडर चालू किए गए, लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी।

बता दें कि इन छोटी फैक्ट्रियों को होंडा, मोटो काप, सुजुकी तथा अन्य नामी कंपनियों के लिए मिडिल मैन के पार्ट बनाने का काम किया जाता है। ऑटो के साथ-साथ गारमेंट तथा सेक्टर के लिए काम करने वाली कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है। विकल्प के रूप में जेनसेट से उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्री तो चलती रही पर उत्पादन उनकी भी बढ़ गई।

केवल बिजली पर ही रहने वाली फैक्ट्री बंद हो गईं। त्योहारी सीजन पर यह समस्या हुई। जिसके चलते करीब दस हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। अनुबंध के तहत उत्पाद बड़े कंपनियों को नहीं देने की वजह से संचालकों को जुर्माना भी झेलना पड़ा। -दीपक मैनी, चेयरमैन, प्रोगेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (हरियाणा)

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