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हरियाणा सरकार ने प्राइवेट बिजली कंपनी के लाइसेंस पर लगाई रोक, CM सैनी ने HERC को धारा 108 के तहत दिए निर्देश

Published: Fri, 23 Oct 2026 08:40 PM (IST)

हरियाणा सरकार ने बिजली वितरण के निजीकरण पर बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) को प्रदेश में ...और पढ़ें

हरियाणा में निजी बिजली वितरण कंपनी के लाइसेंस पर सरकार की रोक।

हरियाणा में निजी बिजली वितरण कंपनी के लाइसेंस पर सरकार की रोक।

HighLights

  1. सरकार ने समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस लागू करने से रोका

  2. एचईआरसी को बिजली अधिनियम धारा 108(1) के तहत निर्देश जारी

  3. उपभोक्ताओं, सरकारी कंपनियों के हितों की रक्षा का हवाला दिया

राजेश मलकानियां, पंचकूला। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) को बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत निर्देश जारी कर प्रदेश में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लागू करने, परिचालन शुरू करने या प्रभावी करने से रोकने को कहा है। ये निर्देश मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी से जारी किए गए हैं। सरकार ने आयोग के सचिव को इन निर्देशों को आयोग के संज्ञान में लाने के लिए कहा है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब एचईआरसी ने 19 अक्टूबर 2026 को याचिका संख्या 30/2026 में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (ईपीपीएल) को गुरुग्राम और नूंह जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया था। इन जिलों में पहले से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड बिजली वितरण का काम कर रहा है।

उपभोक्ताओं और सरकारी बिजली निगमों के हितों का दिया हवालाल

सरकार की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि समानांतर लाइसेंस दिए जाने से प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं, सरकारी बिजली वितरण कंपनियों और जनहित पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता है। सरकार के अनुसार, लाइसेंस दिए जाने के बाद आम जनता, उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली कर्मचारियों में असंतोष और आशंकाओं की जानकारी भी मिली है।

निर्देशों में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने लाइसेंस देने का विरोध करते हुए कंपनी की वित्तीय क्षमता, ऋण चुकाने की विश्वसनीयता, तकनीकी तैयारियों और पूरे लाइसेंस क्षेत्र में सभी उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता पर सवाल उठाए थे।

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क्रॉस सब्सिडी और पुराने बिजली नेटवर्क पर भी चिंता

सरकार ने समानांतर लाइसेंस के संभावित प्रभावों को लेकर कई मुद्दे उठाए हैं। इनमें अधिक राजस्व वाले उपभोक्ताओं को चुनिंदा तरीके से अपने साथ जोड़ने की आशंका, क्रॉस सब्सिडी पर प्रभाव, पहले से किए गए बिजली खरीद समझौतों की देनदारियां, अनुपयोगी पड़ने वाले संसाधनों की लागत और वितरण नेटवर्क के दोहराव से होने वाला अतिरिक्त खर्च शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि इन परिस्थितियों का असर मौजूदा बिजली वितरण कंपनी और उसके उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। हालांकि, निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार फिलहाल 19 अक्टूबर के आयोग के आदेश में दिए गए निष्कर्षों की सही-गलत होने की जांच नहीं कर रही है। सरकार ने अपनी नीति और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।

धारा 108 के तहत जारी किए निर्देश

बिजली अधिनियम की धारा 108(1) राज्य सरकार को जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों में विद्युत नियामक आयोग को लिखित निर्देश देने का अधिकार देती है। इसी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने आयोग को निर्देश दिया है कि हरियाणा में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस बनाया, चालू या प्रभावी न किया जाए।

सरकार के इस कदम से गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए लाइसेंस के कार्यान्वयन पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि, इन निर्देशों के बाद आयोग की ओर से क्या औपचारिक कदम उठाए जाते हैं और लाइसेंस के संबंध में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, यह स्पष्ट होना बाकी है।

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान निजी कंपनी को लाइसेंस देने का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। अब राज्य सरकार के इन निर्देशों से निजी बिजली वितरण के मुद्दे पर आगे की कार्रवाई का केंद्र हरियाणा विद्युत नियामक आयोग बन गया है।

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