हरियाणा के 12 हजार गेस्ट टीचर नहीं होंगे परमानेंट, कानूनी कसौटी पर दावा खारिज
हरियाणा सरकार ने 12 हजार अतिथि अध्यापकों को नियमित करने से इनकार कर दिया है। विभाग ने बताया कि उनकी ...और पढ़ें

फोटो एआई टूल की सहायता से बनाई गई है।
HighLights
12 हजार अतिथि अध्यापकों का नियमितीकरण रद
नियुक्ति प्रक्रिया नियमित मानकों के अनुरूप नहीं
हाई कोर्ट के आदेश पर सरकार का फैसला
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा में नियमितीकरण की उम्मीद लगाए बैठे करीब 12 हजार अतिथि अध्यापकों को प्रदेश सरकार ने बड़ा झटका दिया है। 21 सालों की सेवा और अदालतों से मिले आदेशों के बाद नियमित शिक्षक का दर्जा पाने की आस लगाए बैठे अतिथि अध्यापकों के दावे को स्कूल शिक्षा विभाग ने कानूनी आधार पर खारिज कर दिया है।
विभाग ने जारी स्पीकिंग ऑर्डर में स्पष्ट किया कि अतिथि अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया नियमित भर्ती के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। इसलिए उन्हें वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों का लाभ नहीं दिया जा सकता।
हरियाणा सरकार का यह फैसला अतिथि अध्यापकों की नियमितीकरण की लड़ाई को एक बार फिर अदालत की चौखट पर ले जा सकता है।
यह आदेश सुखविंदर सिंह बनाम हरियाणा राज्य मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 25 मई 2026 को संबंधित याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार की अपील पर छह अगस्त 2026 को खंडपीठ ने व्यवस्था दी कि दावे का फैसला उपलब्ध तथ्यों और कानून के स्थापित सिद्धांतों के आधार पर किया जाए। यदि नियमितीकरण का दावा नीति के तहत बनता है तो लाभ दिया जाए, अन्यथा सरकार उचित कारणों सहित स्पीकिंग आर्डर जारी कर सकती है। शिक्षा विभाग ने इसी प्रक्रिया के तहत नियमितीकरण से मना किया है।
नियुक्ति प्रक्रिया को बताया नियमितीकरण की राह में सबसे बड़ी बाधा
सरकार ने आदेश में अतिथि अध्यापकों की नियुक्ति के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2005 से उन्हें स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्रति पीरियड के आधार पर लगाया गया था। संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों, मुख्याध्यापकों और अधिकारियों ने स्थानीय जरूरत के अनुसार सेवाएं लीं।
विभाग का तर्क है कि यह नियमित भर्ती नहीं, बल्कि सीमित अवधि के लिए काम लेने की व्यवस्था थी। नियुक्तियों में नियमित भर्ती की तरह केंद्रीकृत चयन, परीक्षा आधारित मेरिट और आरक्षण प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
नियुक्तियों को 2014 की नियमितीकरण नीतियों के दायरे में लाना संभव नहीं है। सरकार ने 16 और 18 जून 2014 की नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित अवधि की सेवा, आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, स्वीकृत रिक्त पद और अन्य शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। इन शर्तों में छूट देने का प्रविधान नहीं है।
केवल लंबी अवधि की सेवा नियमितीकरण का आधार नहीं
शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी फैसले सहित विभिन्न न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल लंबी सेवा के आधार पर नियमितीकरण का अधिकार नहीं बनता।
सरकार ने मदन सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी संदर्भ दिया और कहा कि 2014 की नीतियों की वैधता का अर्थ यह नहीं है कि उनके तहत निर्धारित पात्रता शर्तें समाप्त हो जाती हैं।
2019 के कानून से मिली सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण का अधिकार नहीं माना
सरकार ने हरियाणा अतिथि अध्यापक सेवा अधिनियम, 2019 को भी अपने फैसले का प्रमुख आधार बनाया है। विभाग के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य अतिथि अध्यापकों की सेवा निरंतरता और कार्यकाल को सुरक्षा देना है, न कि उन्हें नियमित शिक्षक का दर्जा या नियमित वेतनमान प्रदान करना।
अनुभव के आधार पर नियमितीकरण से संबंधित जग्गो बनाम भारत संघ मामले को भी अतिथि अध्यापकों के पक्ष में स्वतः लागू मानने से इनकार किया गया है।
सरकार से मांग मनवाने में सामने आई गुटबाजी फैसले का असर अतिथि अध्यापकों के आंदोलन पर पड़ सकता है। नियमितीकरण पर एक गुट उग्र प्रदर्शन कर रहा था, जबकि दूसरा शांतिपूर्ण तरीके से मांग मनवाने के पक्ष में था। अब दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। अतिथि अध्यापक हाईकोर्ट में चुनौती देते हैं तो आदेश में दिए गए तर्कों और लागू कानूनों की न्यायिक समीक्षा होगी।
