SIR के बाद हरियाणा की वोटर लिस्ट में बड़ा उलटफेर, 34 लाख मतदाता सूची से बाहर; सिमट कर रह गए 1.66 करोड़
हरियाणा में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के तहत मतदाता सूची में बड़ा बदलाव आया है। शुरुआत में 2.06 करोड़ मतदाताओं में से 34 लाख नाम हटाए गए हैं।

हरियाणा मतदाता सूची में भारी उलटफेर, 34 लाख नाम बाहर, 1.67 करोड़ पर सिमटी संख्या।
HighLights
हरियाणा में विशेष गहन पुनरीक्षण से 34 लाख मतदाता सूची से बाहर।
करीब 5 लाख मतदाता नाम और कटने की संभावना।
अंतिम मतदाता सूची 6 नवंबर को होगी प्रकाशित।
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) केवल नामों की जांच और गलतियां दुरुस्त करने की कवायद नहीं रह गया है। इसने प्रदेश की मतदाता सूची का पूरा गणित ही बदल डाला है। एसआईआर शुरू होने के समय राज्य के 90 विधानसभा क्षेत्रों में 2 करोड़ 6 लाख मतदाता दर्ज थे।
अभियान के दौरान करीब 34 लाख नाम अलग-अलग कारणों से मतदाता सूची से बाहर हो गए। अब करीब पांच लाख मतदाताओं के नाम इस सूची से और कटने की संभावना है।
ऐसा इसलिए कि त्रुटियां ठीक कराने के नोटिस के बावजूद यह पांच लाख मतदाता अभी तक संशोधन के दावों के साथ आगे नहीं आए हैं। इस स्थिति में हरियाणा के मतदाताओं की संख्या घटकर एक करोड़ 67 लाख रहने की संभावना बन गई है।
44 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम-उम्र और पिता के नाम में कमियां
हरियाणा के निर्वाचन विभाग की जांच में 44 लाख 92 हजार मतदाताओं के नाम, उम्र, पिता के नाम, पते या अन्य विवरण में कमियां सामने आईं। यानी बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता मिले, जिनका रिकॉर्ड अंतिम सूची में बनाए रखने से पहले दोबारा सत्यापित किया जाना है। यह मतदाता उन 34 लाख मतदाताओं से अलग हैं, जिनके नाम पहली बार में ही सूची से बाहर हो चुके हैं।
यही वजह है कि आने वाले करीब डेढ़ महीने हरियाणा की मतदाता सूची के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं। निर्वाचन विभाग ने जिन 44 लाख 92 हजार मतदाताओं को त्रुटियां ठीक कराने के नोटिस भेजे थे, उनमें से करीब 40 लाख मतदाताओं ने अपनी त्रुटियां ठीक कराने के लिए बीएलओ के जरिए दावे दाखिल कर दिए हैं।
इन दावों पर सुनवाई 20 अक्टूबर तक चलेगी। दूसरी तरफ करीब पांच लाख मतदाता अभी तक दावा दाखिल करने की प्रक्रिया में आगे नहीं आए हैं। उनके पास 30 सितंबर तक का समय है, जबकि जिन 40 लाख मतदाताओं ने त्रुटियां ठीक कराने के लिए दावे पेश किए हैं, उनका निस्तारण 28 अक्टूबर तक किया जाना है।
एसआईआर के आंकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे केवल 34 लाख नाम हटने के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। मतदाता सूची में दर्ज 44.92 लाख नामों के रिकॉर्ड में अलग-अलग स्तर पर विसंगतियां मिली हैं, जो बहुत बड़ा आंकड़ा है।
असली परीक्षा दावे और उनकी सुनवाई की
अब असली परीक्षा दावे और उनकी सुनवाई की है। जिन करीब 40 लाख लोगों ने दावा पेश कर दिया है, उनके रिकॉर्ड की जांच के बाद तय होगा कि कौन-सा नाम किस संशोधन के साथ सूची में रहेगा। वहीं, जिन करीब पांच लाख लोगों ने अभी तक दावा नहीं किया है, उनके लिए 30 सितंबर महत्वपूर्ण तारीख है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि अभी 34 लाख नाम हटने का आंकड़ा अंतिम नहीं है। सुनवाई के दौरान कुछ नाम दोबारा जुड़ सकते हैं, कुछ रिकॉर्ड संशोधित हो सकते हैं और कुछ नाम आगे भी सूची से बाहर हो सकते हैं।
अंतिम सूची तक वोटरों का गणित बदलता रहेगा
एसआईआर से पहले 2 करोड़ 6 लाख मतदाता थे। इसमें से करीब 34 लाख नाम बाहर होने के बाद संख्या लगभग 1 करोड़ 72 लाख के आसपास बैठती है। यदि दावा नहीं करने वाले करीब पांच लाख मतदाताओं के नाम भी अंतिम प्रक्रिया में हटते हैं, तो यह संख्या करीब 1 करोड़ 67 लाख तक पहुंच सकती है।
अंतिम वास्तविक संख्या 6 नवंबर को शुद्ध एवं पूर्ण मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही सामने आएगी। यानी अभी हर हटे हुए नाम को स्थायी रूप से बाहर मानना और हर लंबित नाम को हटना मान लेना दोनों ही जल्दबाजी होगी।
एसआईआर का राजनीतिक असर भी कम नहीं
मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की इस पूरी प्रक्रिया का राजनीतिक असर भी दिखाई दे रहा है। कांग्रेस की ओर से करीब 25 लाख वोटों की कथित चोरी का आरोप लगाते हुए प्रदेशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
वहीं, हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजकुमार लोहान का कहना है कि मतदाता सूचियों को अपग्रेड और संशोधित करने की निर्धारित प्रक्रिया जारी है। इसलिए मौजूदा विवाद का निर्णायक आधार अंतिम मतदाता सूची और उसके पीछे की सत्यापन प्रक्रिया होगी।
अब नजर तीन तारीखों पर
- 30 सितंबर, जब लंबित मतदाता दावे दाखिल कर सकेंगे
- 28 अक्टूबर, जब दावे-आपत्तियों का निस्तारण पूरा होना है
- 6 नवंबर, जब अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। यही सूची तय करेगी कि एसआईआर के बाद हरियाणा के मतदाता आधार में वास्तविक रूप से कितना बदलाव आया।
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