विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पलवल में पराली जलाने वालों की खैर नहीं, दैनिक जागरण की खबर के बाद 13 संवेदनशील गांवों में उड़ेंगे ड्रोन

Published: Thu, 29 Oct 2026 11:46 AM (IST)

पलवल प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 13 संवेदनशील गांवों में ड्रोन से निगरानी का ...और पढ़ें

प्रशासन ने ड्रोन के माध्यम से कृषि क्षेत्रों की निगरानी करने का बड़ा निर्णय लिया है। एआई इमेज

प्रशासन ने ड्रोन के माध्यम से कृषि क्षेत्रों की निगरानी करने का बड़ा निर्णय लिया है। एआई इमेज

HighLights

  1. पलवल में पराली जलाने पर ड्रोन से होगी कड़ी निगरानी।

  2. दैनिक जागरण की खबर के बाद प्रशासन ने लिया फैसला।

  3. 13 संवेदनशील गांवों को किया गया है चिन्हित।

जागरण संवाददाता, पलवल। जिले में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने अब कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

अंतरिक्ष से नजर रखने वाले हरसेक एप और कृषि विभाग के रिकाॅर्ड में भले ही एक भी मामला दर्ज न हो, लेकिन धरातल पर सुलगती पराली की घटनाओं को देखते हुए अब प्रशासन ने ड्रोन के माध्यम से कृषि क्षेत्रों की निगरानी करने का बड़ा निर्णय लिया है।

प्रशसान यह संज्ञान दैनिक जागरण में 27 अक्टूबर के अंक में प्रकाशित खबर हरसेक में शून्य मामले, खेतों में सुलग रही पराली शीर्षक नामक खबर प्रकाशित होने के बाद लिया गया है।

13 संवेदनशील गांव चिन्हित 

जिला उपायुक्त जयेंद्र सिंह छिल्लर ने आदेश जारी किए हैं कि जिले के 13 संवेदनशील गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां ड्रोन से विशेष नजर रखी जाएगी। हसनपुर के गांव खांबी, हसनपुर, महोली एवं लिखी, खंड होडल के गांव भिडूकी, पालरी, भुलवाना तथा खंड पलवल के गांव जनौली, मांदकोल, मीसा, किठवाड़ी व घोड़ी सहित संबंधित कृषि क्षेत्रों की ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि इन क्षेत्रों में पराली जलाने की संभावित घटनाओं की समय रहते पहचान की जा सके और तुरंत नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हरसेक एप और कृषि विभाग के दावों पर उठे थे सवाल

सेटेलाइट के माध्यम से हरसेक एप आगजनी वाली तस्वीरों को कैद करता है और इसकी जानकारी कृषि विभाग के पास पहुंचती है। लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में जिले में पराली जलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं है।

मंगलवार को दैनिक जागरण ने इस सीजन में जिले में पराली जलाने का एक भी मामला दर्ज न होने को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कई किसान चोरी-छिपे खेतों में पराली में आग लगा रहे हैं।

बाद में खेत की जुताई कर आग के निशान मिटा रहे हैं। लेकिन यह घटनाएं नहीं पकड़ी जा रही थी, जिसके चलते जिला प्रशासन ने अब धरातल पर ड्रोन का सहारा लेने का यह कदम उठाया है।

पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव

उपायुक्त ने किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे धान की पराली में आग न लगाएं और फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि यंत्रों एवं वैकल्पिक तकनीकों का उपयोग करें।

पराली जलाने से वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। किसानों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है।

यह भी पढ़ें- पलवल के 31 गांवों में कैंसर का खतरा, 14 गांवों में मिले 122 मरीज; नहरों के पानी में BOD का स्तर 50 तक पहुंचा

यह भी पढ़ें- 135 दिन बाद खुला सोहना-पलवल हाईवे, धारूहेड़ा-भिवाड़ी लेन पर आवाजाही शुरू; त्योहारों पर मिली राहत