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पलवल के 31 गांवों में कैंसर का खतरा, 14 गांवों में मिले 122 मरीज; नहरों के पानी में BOD का स्तर 50 तक पहुंचा

Published: Thu, 29 Oct 2026 11:15 AM (IST)

पलवल जिले में स्वास्थ्य विभाग के विशेष अभियान में 14 गांवों में 122 सक्रिय कैंसर मरीज मिले हैं। नहरों में ...और पढ़ें

रसायनयुक्त पानी से जिले के गांवों से गुजर रही गोछी ड्रेन का पानी हुआ काला। जागरण

रसायनयुक्त पानी से जिले के गांवों से गुजर रही गोछी ड्रेन का पानी हुआ काला। जागरण 

HighLights

  1. पलवल के 14 गांवों में 122 सक्रिय कैंसर मरीज मिले।

  2. नहरों में दूषित औद्योगिक पानी बीमारियों का मुख्य कारण।

  3. पानी में बीओडी स्तर मानक से 12 गुना अधिक।

कुलवीर चौहान, पलवल। जिले में कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। अभियान के तहत 14 गांवों अलावलपुर, अल्लिका, औरंगाबाद, सौंध, बंचारी, बेढ़ा पट्टी, दीघोट, बघोला, भिड़ूकी, बडोली, चांट, धतीर, हसनपुर, जनौली और सराय खटेला कैंसर के 122 एक्टिव मरीज मिले हैं।

31 गांवों में से 14 गांवों में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

जिले के सभी गांवों और शहरी क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जांच होने के बाद मरीजों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की आशंका है। दैनिक जागरण द्वारा नहरों में दूषित पानी छोड़े जाने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मामला उठने के बाद प्रशासन ने यह अभियान शुरू किया था। प्रथम चरण में चिन्हित 31 गांवों में से 14 गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर स्क्रीनिंग पूरी कर चुकी हैं।

जिले में फिलहाल 365 कैंसर मरीज ही दर्ज

स्वास्थ्य विभाग के इस विशेष अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में फिलहाल 365 कैंसर मरीज ही दर्ज हैं। वहीं, 14 गांवों में ही बड़ी संख्या में मरीजों का सामने आना व्यापक जांच की आवश्यकता को दर्शाता है। हालांकि, अभी स्वास्थ्य विभाग की जांच अन्य गांवों में जारी है। इस जांच के बाद कैंसर के मरीजों का वास्तविक आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से काफी अधिक हो सकता है।

दूषित पानी से हो रही खेती से बढ़ रही बीमारियां

जिले में नहरों और ड्रेनों के पानी की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। दिल्ली, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक पानी गुड़गांव कैनाल, आगरा कैनाल और गौंछी ड्रेन में छोड़ा जा रहा है।

पानी में सुरक्षा मानक से 12 गुना ज्यादा केमिकल

इसके अलावा टैंकरों के माध्यम से भी रासायनिक कचरा ड्रेनों में डाले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

हालात इतने खराब हैं कि कुछ स्थानों पर पानी में जैव रासायनिक आक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर निर्धारित चार मिलीग्राम प्रति लीटर के मानक के मुकाबले करीब 50 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

भूमिगत जल खारा होने के कारण कई क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के लिए इन वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में दूषित पानी का इस्तेमाल करने से हो रही खेती के कारण बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं।

विभिन्न बीमारियों के मरीज भी मिले

अभियान के दौरान विभिन्न बीमारियों से संबंधित नई जांच भी की गई हैं। हाइपरटेंशन के 560 परीक्षणों में 90, मधुमेह के 55 संदिग्ध मरीजों की पहचान हुई। साथ ही नई जांच में ओरल कैंसर के एक और ब्रेस्ट कैंसर के पांच संदिग्ध मामले सामने आए। कैंसर से संबंधित जांच और अन्य बीमारियों के परीक्षणों के आंकड़ों को विभाग की विस्तृत रिपोर्ट में शामिल किया जा रहा है।

शुरुआत में 31 गांवों में चलाएंगे अभियान

जिले के विभिन्न गांवों में कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए व्यापक जांच अभियान चलाया जा रहा है। प्रथम चरण में 31 गांव शामिल किए गए हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य गांवों में भी यह अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद वास्तविक स्थिति का पता लगेगा।

-डाॅ. सतिंदर वशिष्ठ, जिला सिविल सर्जन।

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