विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पलवल में अभी भी पराली जला रहे किसान, घटनाओं को नहीं पकड़ पा रहा HARSAC एप; कृषि विभाग के दावों पर उठ रहा सवाल

Published: Mon, 26 Oct 2026 05:58 PM (IST)

सरकार द्वारा पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही है। हालांकि इसके बाद भी ...और पढ़ें

पराली जलाने की घटनाएं हरसेक एप की पकड़ से बाहर

पराली जलाने की घटनाएं हरसेक एप की पकड़ से बाहर

HighLights

  1. पराली जलाने की घटनाओं में कमी, पर पूरी तरह अंकुश नहीं।

  2. हरसेक ऐप पराली जलाने की घटनाओं को नहीं पकड़ पा रहा।

  3. कृषि विभाग के दावों पर उठे सवाल, जमीनी हकीकत अलग।

जागरण संवाददाता, पलवल। सरकार द्वारा तमाम कोशिशों और जागरूकता अभियानों के बाद पराली जलाने की घटनाओं पर काफी कमी आई है। लेकिन अभी भी जिले में कई जगह किसानों द्वारा धान की पराली जलाई जा रही है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।

खेतों में सुलगती पराली की ये घटनाएं अंतरिक्ष से नजर रखने वाला हरसेक ऐप नहीं पकड़ पा रहा है। कृषि विभाग के रिकार्ड के अनुसार इस सीजन में कृषि क्षेत्र में किसी भी स्थान पर पराली जलने की घटना सामने नहीं आई है।

पराली न जलाने के लिए दी जा रही प्रोत्साहन राशि

बता दें कि सरकार किसानों को धान के अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहन राशि दे रही है। योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, सत्यापन उपरांत पात्र किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

कृषि विभाग के दावों पर सवाल

इसके अलावा, पराली जलाने वाले किसानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने और प्रशासनिक स्तर पर ग्राम कमेटियों के गठन के दावे भी किए जा रहे हैं। प्रशासन के कागजों में इस बार जिले के सिर्फ दो ही गांव यलो जोन में दिखाए गए हैं।

कृषि विभाग का कहना है कि इस बार पराली जलाने की घटनाओं पर ज्यादातर अंकुश लग चुका है। सभी गांवों में कमेटी बनाई गई हैं। नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं।

ऐप नहीं पकड़ पा रहा पराली जलाने की घटनाएं

ऐसा नहीं है कि जिले में कहीं भी पराली नहीं जलाई जा रही है। धरातल पर अन्य वर्षों की तरह आधाधुंध तरीके से पराली नहीं जलाई जा रही है, लेकिन इस पर पूरी तरह अंकुश भी नहीं लगा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से हरसेक ऐप से मिलने वाली लोकेशन के भरोसे हैं।

स्थिति यह है कि ऐप कई बार जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आता है। इस सीजन में इस एप ने चार आगजनी घटनाएं कैद कीं, लेकिन यह सभी औद्योगिक क्षेत्र की थी।

पराली जलाने वालों पर होगी कार्रवाई

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक जगीर सिंह के अनुसार उनके अधिकारी फील्ड में उतरकर निगरानी कर रहे हैं। इस बार धान की पराली जलाने की कोई घटना सामने नहीं आई है। यदि कहीं पराली जलाने की शिकायत मिलती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें- पलवल एलिवेटेड फ्लाईओवर मरम्मत: पहले दिन ही शहर में लगा भीषण जाम, यातायात व्यवस्था पर सवाल

यह भी पढ़ें- पलवल में डीएपी खाद की किल्लत से किसान बेहाल, बिजाई पर संकट