पलवल में नहरों के जहरीले पानी से खेतों में पहुंच रहे भारी धातु, इंडस्ट्रियल तरक्की के बीच 100 गांवों पर कैंसर का खतरा
पलवल में औद्योगिक विकास के कारण नहरों में जहरीला पानी बहाया जा रहा है, जिससे भूजल, फसलें और लोगों का ...और पढ़ें

जिले के विभिन्न गांवों से निकल रही आगरा कैनाल नहर। जागरण
HighLights
औद्योगिक कचरे से नहरों का पानी हुआ जहरीला।
भूजल, फसलें दूषित, 100 से अधिक गांवों में कैंसर का खतरा।
स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में जांच अभियान चलाएगा।
कुलवीर चौहान, पलवल। जिले में पिछले बीस सालों में उद्योगों का तेजी से विकास हुआ है, जिससे रोजगार और तरक्की के नए रास्ते खुले हैं। हालांकि, इसी औद्योगिक प्रगति ने अब ग्रामीणों के जीवन में बड़ा पर्यावरणीय संकट पैदा कर दिया है।
क्षेत्र में हवा और पानी का प्रदूषण बहुत अधिक बढ़ चुका है। दिल्ली, फरीदाबाद और स्थानीय फैक्ट्रियों का जहरीला रासायनिक पानी नहरों में बहाया जा रहा है, जिससे भूजल, फसलें और लोगों की सेहत बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। आलम यह है 100 से अधिक गांवों में कैंसर का खतरा बढ़ गया है।
दूषित जल और फसलों पर प्रभाव
जिस पानी का इस्तेमाल 40 साल पहले पीने के लिए किया जाता था, आज उसे छूना भी खतरनाक हो चुका है। भूजल खारा होने के कारण किसान आगरा नहर, रजवाहों और ड्रेनों के जहरीले पानी से ही फसलों की सिंचाई करने को मजबूर हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में मौजूद कैडमियम, क्रोमियम, आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन जैसी भारी धातुएं (हैवी मेटल्स) फसलों और अनाज में पहुंच रही हैं। जब यही भोजन लोग खाते हैं, तो वे कैंसर और काले पीलिया (हेपेटाइटिस) जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
जल गुणवत्ता के आंकड़ों में डरा रहा बीओडी स्तर
पानी में 'बायो ऑक्साइड डिमांड' (बीओडी) का सुरक्षित स्तर 4 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए, लेकिन इस क्षेत्र की नहरों में यह स्तर 40 मिलीग्राम के आसपास पहुंच गया है। बीओडी का स्तर 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर जाते ही पानी जलीय जीवों और इंसानों के लिए घातक बन जाता है। इस जहरीले पानी से कैंसर के अलावा हड्डियां कमजोर होना, गुर्दे और त्वचा से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं।
बासवां गांव का मामला
वर्ष 2016 में आगरा कैनाल के पास बसे बासवां गांव में दो महीने के भीतर कई मौतें हुई थीं, जिससे हड़कंप मच गया था। स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में माना गया था कि दूषित नहर के पानी से सींची गई फसलें ही इसका कारण थीं। हालांकि, बाद में इस जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और किसी विभाग ने इस पर आगे कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
100 से अधिक गांवों में कैंसर का डर
आगरा कैनाल और गोछी ड्रेन के आसपास बसे बासवां, भिडूकी, खांबी, असावटा, बाता, किठवाड़ी, अलावलपुर, ललपुरा, दुधोला, धतीर, सिकंदरपुर, अल्लिका और दिघोट समेत 100 से अधिक गांवों में कैंसर का प्रकोप बढ़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों में कैंसर के 340 मरीज दर्ज हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह संख्या काफी अधिक है। महंगे इलाज के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह तबाह हो रहे हैं।

ग्रीवांस कमेटी और जनप्रतिनिधियों की पहल
कैंसर के बढ़ते मामलों का मुद्दा पृथला के विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया ने ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में उठाया था। इसके बाद मंत्री राव नरवीर सिंह ने स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित गांवों में तुरंत विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने और जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने भी अल्लीका गांव की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष राम गोपाल यादव को पत्र भेजकर केंद्रीय डॉक्टरों की टीम से जांच कराने की मांग की है।
प्रशासनिक अनदेखी और ग्रामीणों की आपबीती
नियमों के मुताबिक उद्योगों को अपना अपशिष्ट जल साफ (ट्रीट) करके ही छोड़ना चाहिए, लेकिन कई इकाइयां खुले में जहरीला पानी बहा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार शिकायतें कर रहे हैं, पर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
- बाता गांव की नीलम शर्मा ने बताया कि उनके परिवार में पिछले आठ सालों में ससुर, चचिया ससुर और ददिया सास सहित 10 लोगों की मौत कैंसर से हुई है।
- लुलवाड़ी गांव के राहुल बैसला ने बताया कि उनकी मां की मृत्यु कैंसर से हुई और गांव में 20 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं।
- धतीर गांव के पूर्व सरपंच बादाम सिंह ने भी गोछी ड्रेन के पानी से फैल रही बीमारियों और प्रशासनिक लापरवाही पर चिंता जताई।
स्वास्थ्य विभाग का प्रस्तावित अभियान
"स्वास्थ्य विभाग पूरे जिले के पलवल शहर, अलावलपुर, अल्लिका, औरंगाबाद, पृथला, हथीन, हसनपुर, जनौली और छायसा समेत दर्जनों गांवों में व्यापक जांच अभियान शुरू करने जा रहा है। इसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों पर 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी नागरिकों की मुफ्त जांच की जाएगी, ताकि कैंसर, उच्च रक्तचाप (बीपी) और मधुमेह (शुगर) जैसी बीमारियों की समय रहते पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके।"
-डॉ. योगेश मलिक, जिला नागरिक अस्पताल।
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