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पलवल में 23 जिलों से आईं 900 खिलाड़ी; गर्मी, पानी, भोजन और शौचालय की बदइंतजामी से हुईं परेशान

Published: Mon, 21 Sep 2026 08:23 PM (IST)

पलवल में आयोजित 59वीं राज्यस्तरीय खो-खो प्रतियोगिता में 23 जिलों से आईं लगभग 900 महिला खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ा। इससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठे।

मैदान पर न छांव की व्यवस्था और न टेंट का सहारा। तपती धूप में सिर पर कपड़ा ढके मैच का इंतजार करतीं खिलाड़ी। अशोक कुमार यादव

मैदान पर न छांव की व्यवस्था और न टेंट का सहारा। तपती धूप में सिर पर कपड़ा ढके मैच का इंतजार करतीं खिलाड़ी। अशोक कुमार यादव

HighLights

  1. 900 महिला खिलाड़ियों को गर्मी, पानी, शौचालय की समस्या हुई।

  2. सरकारी स्कूलों में ठहरने की व्यवस्था अव्यवस्थित और भीड़भाड़ वाली।

  3. भोजन और पेयजल की गुणवत्ता-उपलब्धता पर खिलाड़ियों ने सवाल उठाए।

अशोक कुमार यादव, पलवल। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडोर स्टेडियम में सोमवार को 59वीं राज्यस्तरीय तीन दिवसीय खो-खो प्रतियोगिता का आगाज तो पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ हुआ, लेकिन आयोजन स्थल से कुछ ही दूरी पर सरकारी स्कूलों में खिलाड़ियों के ठहरने और मूलभूत सुविधाओं की तस्वीर सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आई। प्रदेश के 23 जिलों से पहुंचीं करीब 900 बेटियां खेल के मैदान में अपना दमखम दिखाने पहुंची थीं, लेकिन उन्हें गर्मी, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए ही जूझना पड़ा।

कई छात्रा खिलाड़ियों ने पूछे सवाल

मंच से खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम बेटियों को आगे बढ़ाने, उन्हें प्रोत्साहित करने और विश्वस्तरीय मंच उपलब्ध कराने की बात कह रहे थे। दूसरी ओर, प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचीं कई छात्रा खिलाड़ियों ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए। खिलाड़ियों का कहना था कि जिस उत्साह के साथ वे अपने जिले का प्रतिनिधित्व करने पहुंची हैं, उसके अनुरूप उनके रहने और सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई।

उमस में बेहाल हुईं बेटियां

हिसार से आईं खिलाड़ी प्रिया, पल्लवी, प्रीति और आंचल ने बताया कि उन्हें जिन सरकारी स्कूलों के कमरों में ठहराया गया है, वहां एक कमरे में करीब 36 खिलाड़ियों को रखा गया है। गर्मी और उमस के बीच पंखे पर्याप्त राहत नहीं दे पा रहे हैं।

खिलाड़ियों के अनुसार सुबह के समय शौचालयों पर भी भीड़ रहती है। नहाने के लिए पर्याप्त बाल्टी और डिब्बों की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन खिलाड़ियों के लिए यह महज किसी प्रतियोगिता में भाग लेने का मामला नहीं है।

कई बेटियां पहली बार राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में अपने जिले का प्रतिनिधित्व करने पहुंची हैं। ऐसे में उनके लिए खेल से जुड़ी तैयारी के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक माहौल मिलना भी जरूरी है।

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स्टेडियम स्थित छात्रावास में पानी लेने पहुंचीं खिलाड़ियों को देखकर गेट पर ताला जड़ दिया गया। जागरण

पानी के लिए भटकती रहीं खिलाड़ी

मैदान में घंटों पसीना बहाने के बाद खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा जरूरत पानी की होती है। खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली। तेज धूप में कई खिलाड़ी सिर ढककर पानी की खाली बोतलें लेकर इधर-उधर भटकती नजर आईं।

खिलाड़ियों का कहना था कि जैसे-तैसे उपलब्ध हो रहा पानी खारा और कड़वा है। छात्रावास में पानी लेने पहुंचीं खिलाड़ियों को भी पानी भरने में परेशानी हुई। उनके अनुसार छात्रावास का मुख्य गेट बंद कर दिया गया। ऐसे में मैदान में खेलकर लौटीं बेटियों के सामने प्यास बुझाने तक की समस्या खड़ी हो गई।

पुराने अनुभवों से भी नहीं लिया सबक

खिलाड़ियों की परेशानी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि गर्मी में आयोजनों के दौरान छात्राओं के बीमार पड़ने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। पांच अगस्त को तिरंगा यात्रा के दौरान गर्मी के कारण दर्जनभर छात्राओं के तबीयत बिगड़ने और 15 अगस्त को करीब आधा दर्जन बेटियों के बेहोश होकर अस्पताल पहुंचने की घटनाओं का हवाला देते हुए सवाल उठ रहे हैं कि इन अनुभवों के बाद भी बड़े आयोजनों में गर्मी, पेयजल और प्राथमिक सुविधाओं को लेकर पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई।

40 रुपये में व्यवस्था, 200 रुपये में खाना

खिलाड़ियों ने आयोजन के बजट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रति खिलाड़ी 40 रुपये खर्च किए जाने की बात कही जा रही है, जबकि खाने के लिए पूरी टीम को प्रति खिलाड़ी 200 रुपये दिए गए हैं।

दूसरी ओर, विद्यालय की कैंटीन में एक सामान्य थाली की कीमत ही 100 रुपये से कम नहीं है। खिलाड़ियों के अनुसार तीन दिन के आयोजन में भोजन और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी जेब से भी पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

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मैदान पर कोच के लिए बोतल में पानी भरकर ले जाता परवेज व साथी छात्र। जागरण

अफसर मौजूद, फिर भी नजर नहीं आईं बेटियों की मुश्किलें

उद्घाटन समारोह में एडीसी उत्सव आनंद, जिला खेल अधिकारी खुशवंत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ. मामराज रावत सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। मंच पर खेल और बेटियों के भविष्य को लेकर बड़े संदेश दिए गए, लेकिन खिलाड़ियों की ओर से सामने आई मूलभूत सुविधाओं की शिकायतें आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े करती हैं।

खेल मैदान में पदक के लिए पसीना बहाने वाली इन बेटियों के लिए कम से कम स्वच्छ पानी, पर्याप्त शौचालय, हवा और भोजन जैसी सुविधाएं किसी विशेष मांग का हिस्सा नहीं, बल्कि एक सुरक्षित खेल आयोजन की बुनियादी जरूरत हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी बोले...

सभी कमरों में पर्याप्त संख्या में पंखे लगवाए गए हैं। लाइट डिम होने की शिकायत हो सकती है। सभी स्कूलों में बाल्टी और डिब्बे रखवाए गए हैं। स्टेडियम में पानी के टैंकर की व्यवस्था भी की गई थी। पानी वहां क्यों नहीं पहुंचा, इसकी गहन जांच कराई जाएगी।

-डाॅ. मामराज रावत, जिला शिक्षा अधिकारी 

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