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3 विभागों की अनदेखी से 'फुटबॉल' बना पलवल स्टेडियम का विकास, खेल मंत्री के जिले में सुविधाओं को तरस रहे खिलाड़ी

Published: Thu, 22 Oct 2026 11:27 AM (GMT+05:30)

पलवल के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में 15.83 करोड़ रुपये की आधुनिक खेल सुविधाओं का प्रोजेक्ट विभागीय देरी के ...और पढ़ें

पलवल में तैयार होगा आधुनिक स्टेडियम

पलवल में तैयार होगा आधुनिक स्टेडियम

HighLights

  1. पलवल स्टेडियम में 15.83 करोड़ के प्रोजेक्ट में देरी।

  2. सिंथेटिक ट्रैक न होने से खिलाड़ी सीमेंटेड सड़कों पर अभ्यास।

  3. विभागीय प्रक्रियाओं के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।

कुलवीर चौहान, पलवल। खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच खेल राज्यमंत्री गौरव गौतम के गृह जिले पलवल में ही खिलाड़ी आधुनिक खेल सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाओं के लिए अभी और लंबा इंतजार करना होगा।

लगभग 15.83 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले प्रोजेक्ट कागजी प्रक्रिया व विभागों के बीच फुटबाल की तरह घूम रहे हैं। काम की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी से एचएसवीपी और फिर एचएसआरडीसी को सौंप दी गई, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इसका खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। करीब 200 एथलीट को सिंथेटिक ट्रैक के अभाव में सीमेंटेड सड़कों पर दौड़कर अभ्यास करना पड़ रहा है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम का होगा विकास

करीब चार एकड़ में फैले नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत सिंथेटिक ट्रैक के साथ बास्केटबाल, वालीबाल, फुटबाल, खो-खो और क्रिकेट के लिए मैदान तैयार किए जाने हैं।

इन प्रोजेक्ट के पूरा होने से पलवल और आसपास के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए बेहतर मंच मिलने की उम्मीद थी। इसके बावजूद प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी एक विभाग से दूसरे विभाग को स्थानांतरित होने के कारण योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।

पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट तैयार कराया गया

स्टेडियम के विकास कार्यों के लिए शुरुआत में खेल विभाग ने पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट तैयार करवाया था। इसके बाद खेल विभाग के मुख्यालय से इस कार्य को पीडब्ल्यूडी के बजाय किसी अन्य विभाग से करवाने के निर्देश मिले। इसके चलते प्रोजेक्ट हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को सौंप दिया गया।

एचएसवीपी ने पहले से कार्यभार अधिक होने का हवाला देते हुए जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया। इसके बाद प्रोजेक्ट हरियाणा राज्य सड़क एवं पुल विकास निगम (एचएसआरडीसी) को सौंप दिया गया।

बार-बार विभाग बदलने से प्रक्रिया में देरी हुई और अब नए सिरे से बजट, परामर्शदाता की नियुक्ति तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसे में खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने में अभी और समय लग सकता है।

सिंथेटिक ट्रैक के अभाव में चोट का खतरा

स्टेडियम में आधुनिक ट्रैक नहीं होने के कारण करीब 200 एथलीट सीमेंटेड और पक्की सड़कों पर दौड़कर अभ्यास करने को मजबूर हैं। कठोर सतह पर लगातार दौड़ने से पैरों, घुटनों और एड़ियों में दर्द व चोट लगने का खतरा बना रहता है। वहीं, सेना भर्ती की तैयारी करने वाले युवा वाहनों की आवाजाही वाले मार्गों और फ्लाईओवरों पर दौड़ लगाते हैं। ऐसे में सड़क दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

खिलाड़ियों का कहना है कि सिंथेटिक ट्रैक और अन्य खेल सुविधाएं उपलब्ध होने से उन्हें सुरक्षित वातावरण में अभ्यास करने का अवसर मिलेगा। इससे उनकी तैयारी और प्रदर्शन में भी सुधार हो सकेगा। खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि बजट स्वीकृत होने के बाद जल्द काम शुरू होगा, लेकिन विभागीय प्रक्रिया के कारण इंतजार लगातार बढ़ रहा है।

बजट मिलने के बाद शुरू होगी अगली प्रक्रिया

एचएसआरडीसी के कनिष्ठ अभियंता राजकुमार के अनुसार, खेल विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर बजट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। बजट मिलने के बाद परामर्शदाता नियुक्त किया जाएगा, जो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन से चार महीने लग सकते हैं।

जिला खेल अधिकारी खुशवंत सिंह ने बताया कि स्टेडियम के विकास कार्यों के लिए पहले पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट तैयार करवाया गया था। बाद में कार्य एचएसवीपी और फिर एचएसआरडीसी को सौंपा गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही कागजी प्रक्रिया पूरी कर विकास कार्य आगे बढ़ाए जाएंगे। विभाग की ओर से खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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