नारनौल के किसान ओमवीर ने गोबर से गैस बनाकर बची स्लरी से तैयार की प्राकृतिक खाद, ऐसे घटाया खेती और गृहस्थी का खर्च
नारनौल के गांव राता निवासी किसान ओमवीर ने पशुपालन से मिलने वाले गोबर का सदुपयोग कर घर पर गोबर गैस ...और पढ़ें

गांव राता का किसान ओमवीर गौबर गैस प्लांट के साथ। जागरण
HighLights
किसान ओमवीर ने गोबर गैस प्लांट लगाकर ईंधन की बचत की।
प्लांट से बची स्लरी से प्राकृतिक खाद बनाकर खेतों में उपयोग।
रासायनिक खाद पर निर्भरता घटी और खेती की लागत कम हुई।
जागरण संवाददाता, मंडी अटली (नारनौल)। खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर गांव राता निवासी किसान ओमवीर ने अपनी अलग पहचान बनाई है। पशुपालन से मिलने वाले गोबर को बेकार समझने के बजाय उन्होंने इसका सदुपयोग करते हुए अपने घर पर गोबर गैस प्लांट स्थापित किया। अब इसी प्लांट से तैयार होने वाली गैस से उनके घर में खाना पकाने का काम किया जाता है। इससे ईंधन की बचत होने के साथ-साथ गोबर का बेहतर उपयोग भी हो रहा है।
रासायनिक खाद पर निर्भरता घटी
ओमवीर के पास दूध की डेयरी होने के कारण प्रतिदिन काफी मात्रा में गोबर उपलब्ध हो जाता है। इसी गोबर को गोबर गैस प्लांट में डालकर गैस तैयार की जाती है। खास बात यह है कि गैस बनने के बाद बचने वाले अवशेष को भी किसान बेकार नहीं जाने देते। प्लांट से निकलने वाली स्लरी से प्राकृतिक खाद तैयार कर वह अपने खेतों में इस्तेमाल करते हैं। इससे खेतों में रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

खेती की लागत में भी आई कमी
ओमवीर का कहना है कि पशुपालन और खेती एक-दूसरे के पूरक हैं। पशुओं से मिलने वाला गोबर खेत के लिए उपयोगी खाद बन जाता है और खेत से मिलने वाला चारा पशुओं के काम आता है। इस तरह दोनों गतिविधियों को आपस में जोड़कर खेती की लागत को कम किया जा सकता है।
अब गांव बन रहा दूसरों के लिए मॉडल
उनकी यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी मिसाल बन रही है। ओमवीर ने बताया कि यदि किसान पशुपालन से निकलने वाले गोबर का सही तरीके से उपयोग करें तो इससे ईंधन की बचत के साथ खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। प्राकृतिक खेती और संसाधनों के बेहतर उपयोग का यह मॉडल गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
